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श्रीमद् भागवत कथा मात्र एक ग्रन्थ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है ,अहंकार से पराजित होते हैं बलशाली : मुलायम सिंह यादव

By santosh singh 
Updated Date

कानपुर देहात। हम कितने भी बलशाली हो जाएं, लेकिन कभी अहंकार नहीं आना चाहिए। 100 कौरवों के होते हुए भी सत्य मार्ग पर चलने वाले पांच पांडवों ने उन्हें पराजित कर दिया। उक्त विचार जिला बार एसोसिएशन कानपुर देहात के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मुलायम सिंह यादव ने ग्राम दुआरी के सरवन खेड़ा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन व्यक्त किए।

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रविवार को कथा स्थल पर पहुंचे मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) ने प्रसिद्ध कथा वाचक पंडित मनीष तिवारी मानस मणि (Storyteller Pandit Manish Tiwari Manas Mani) को अंगवस्त्र एवं फूल-मालाओं से सम्मानित किया। इसके बाद पंडाल में उपस्थित भक्तों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मात्र एक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन जीने की कला है। यह मनुष्य को अहंकार से विनम्रता मोह से वैराग्य और अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाती है। उन्होंने आगे जोर देकर कहा समाज द्वारा बनाए गए नियम गलत हो सकते हैं लेकिन भगवान के बनाए नियम कभी गलत नहीं होते। परमात्मा के नियम लोकहित के लिए होते हैं।

इस अवसर पर उनके साथ रमेश चंद्र सिंह गौर, डॉ. आनंद सिंह ,सतीश कुमार अग्निहोत्री ,नितिन दुबे ,शंकर सिंह ,अनिल दुबे ,गिरजा शंकर दीक्षित ,शिवपाल सिंह भदौरिया ,राजा सिंह कछवाहा व मनी मिश्रा भी उपस्थित रहे। कथा में ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी और सभी ने वक्ताओं के उद्गारों पर तालियां बजाईं।

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