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सीजफायर के बीच समुद्र में तनाव: ईरान ने किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कमर्शियल कार्गो शिप पर हमला

By हर्ष गौतम 
Updated Date

Strait of Hormuz: मध्य पूर्व से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है, वहीं दूसरी तरफ समुद्र में तनाव खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ सीजफायर जारी रखने का फैसला किया है, लेकिन इसी बीच ईरानी सेना ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कमर्शियल कार्गो शिप पर हमला कर दिया है।

पढ़ें :- ईरान- यूएस युद्ध के बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने गनबोट पर की गोलाबारी

सीजफायर पर सस्पेंस, लेकिन नाकेबंदी जारी

ट्रंप ने साफ किया है कि सीजफायर तब तक जारी रहेगा जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता। हालांकि, अमेरिकी रक्षा हलकों में यह चर्चा है कि यह राहत केवल 3 से 5 दिन की हो सकती है। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सीजफायर का मतलब नाकेबंदी हटाना नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और घेराबंदी बरकरार है, जिससे नाराज ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की चेतावनी दी है।

ओमान के पास हमला, बाल-बाल बचा जहाज

हमले की पुष्टि यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने की है। रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान के तट के पास ईरानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की गनबोट ने कार्गो शिप पर प्रोजेक्टाइल से हमला किया। इस हमले में जहाज के कुछ कंटेनर क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन राहत की बात यह रही कि आग नहीं लगी और क्रू मेंबर्स सुरक्षित हैं। जहाज फिलहाल सुरक्षित क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है।

हाई अलर्ट पर समुद्री रूट, बढ़ा वैश्विक खतरा

इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों में हड़कंप मच गया है। यूनाइटेड किंगडम मैरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने इस रूट से गुजरने वाले जहाजों के लिए हाई-अलर्ट जारी किया है और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना देने को कहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में हमले और बढ़ सकते हैं, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

ईरान का साफ संदेश: पहले हटे नाकेबंदी

ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपनी घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक यह समुद्री रास्ता सुरक्षित नहीं रहेगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के लिए पहले अमेरिका को प्रतिबंध और दबाव कम करना होगा। अब पूरी दुनिया की नजरें वॉशिंगटन पर टिकी हैं कि डोनाल्ड ट्रंप इस चुनौती का जवाब सैन्य कार्रवाई से देते हैं या कूटनीति के रास्ते समाधान निकालते हैं।

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