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Sugar Crisis: चीनी के बढ़ते दाम का असली खेल क्या? एथेनॉल पर उठे सवालों के बीच सरकार ने खोला पूरा राज

By Kalpna Pandey 
Updated Date

Sugar Crisis: देश में  पिछले कुछ समय से चीनी की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है और इस बढ़ोतरी को लेकर एथेनॉल उत्पादन पर भी सवाल उठ रहे हैं। लेकिन अब केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि चीनी की कीमतों में मौजूदा तेजी के लिए सिर्फ एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। इसके पीछे कम उत्पादन, मौसम की मार, बढ़ती मांग और वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी समेत कई कारण हैं।

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एथेनॉल में चीनी का इस्तेमाल हुआ कम

सरकार के मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में घटा है। 2022-23 में करीब 12 फीसदी चीनी एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल होती थी, जबकि 2025-26 में यह घटकर लगभग 9 फीसदी रह गई है। इसके अलावा एथेनॉल उत्पादन के लिए अब मक्के का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। ऐसे में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई दूसरे कारण भी हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा सीजन में देश में करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) चीनी उत्पादन का अनुमान है। वहीं, गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान करीब 343 LMT था। यानी उत्पादन शुरुआती अनुमान से काफी कम रहने की संभावना है। इसका असर बाजार में चीनी की कीमतों पर पड़ रहा है।

बारिश और फसल की बीमारियों का भी असर

गन्ने की फसल को मौसम की मार का भी सामना करना पड़ा है। कई इलाकों में ज्यादा बारिश और जलभराव से फसल प्रभावित हुई। इसके अलावा रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों ने भी गन्ने की उत्पादकता को नुकसान पहुंचाया है। वहीं त्योहारों से पहले चीनी की मांग बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी भी कीमतों पर असर डाल रही है। सरकार ने जमाखोरी और सट्टेबाजी को भी कीमतों में तेजी के संभावित कारणों में शामिल किया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बढ़े चीनी के दाम

चीनी की कीमतों में तेजी सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। सरकार के मुताबिक, 2026-27 में वैश्विक स्तर पर करीब 33 लाख मीट्रिक टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 जून 2026 को चीनी की कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में कीमत में 16 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई।

सरकार बोली- देश में पर्याप्त स्टॉक

हालांकि सरकार का कहना है कि नए क्रशिंग सीजन की शुरुआत तक घरेलू मांग पूरी करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक उपलब्ध है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि एथेनॉल उत्पादन को चीनी संकट की वजह मानना सही नहीं है। सरकार के अनुसार, अतिरिक्त चीनी का एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने से अतिरिक्त स्टॉक को कम करने में मदद मिलती है। इससे चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है और गन्ना किसानों को भुगतान करने की क्षमता भी बेहतर होती है। कुल मिलाकर सरकार का संदेश साफ है—चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे सिर्फ एथेनॉल नहीं, बल्कि कम उत्पादन, मौसम, बढ़ती मांग और वैश्विक बाजार जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।

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