नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में टीएमसी (TMC) की करारी हार के बाद पार्टी छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) का दामन थामने वाले सांसदों को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नोटिस जारी किया है। अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख करते हुए मांग की थी कि लोकसभा अध्यक्ष को 20 बागी सांसदों को अयोग्य ठहराने को लेकर जल्द फैसला करने का अनुरोध किया था। सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) , जस्टिस जॉयमाल्या बागची (Justice Joymalya Bagchi) और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने बागी सांसदों से अपना जवाब देने को कहा है।
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में ऐसा ही एक और मामला अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) ने लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय और लोकसभा महासचिव को भी नोटिस जारी करने की मांग की थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इससे इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उनकी तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में इसी तरह के एक और मामले की सुनवाई चल रही है। शिवसेना (UBT) ने अपने 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे की अगुआई वाली शिवसेना में शामिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का रुख किया था। इस याचिका पर जस्टिस पीए नरसिम्हा और आलोक अराधे की बेंच सुनवाई कर रही है।
यह है बागीं सांसदों की पूरी लिस्ट
काकोली घोष दस्तीदार
शताब्दी रॉय
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बापी हलदरसायोनी घोष
खलीलुर्रहमान
अबू ताहिर खान
यूसुफ पठान
मिताली बैग
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डॉ शर्मिला सरकार
प्रसून बंद्योपाध्याय
जगदीश बर्मा बसुनिया
असित कुमार मल
अरूप चक्रवर्ती
रचना बनर्जी
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माला रॉय
कालीपद सोरेन
दीपक अधिकारी
जून मालिया
पार्थ भौमिक
अयोग्यता की कार्रवाई में देरी को चुनौती बनर्जी ने अपनी याचिका में सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसला लेने में कथित देरी को चुनौती दी है। तृणमूल नेता ने लोकसभा अध्यक्ष को संविधान के दलबदल विरोधी प्रावधानों के अनुसार अयोग्यता संबंधी याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए निर्देश का अनुरोध किया है। उन्होंने इससे पहले 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं और बाद में लोकसभा अध्यक्ष से इनका जल्द निपटारा करने का अनुरोध किया था।
लोकसभा अध्यक्ष से मिले थे बनर्जी खबरों के मुताबिक, इस मुद्दे पर बनर्जी ने 27 जुलाई को लिखित रूप से याद दिलाने के बाद 12 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Lok Sabha Speaker Om Birla) से मुलाकात भी की थी। यह विवाद तृणमूल के संसदीय दल में हुई बगावत के बाद सामने आया है। तृणमूल के 20 लोकसभा सांसदों ने घोषणा की थी कि वे त्रिपुरा स्थित राजनीतिक संगठन नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं या उसके साथ विलय कर लिया है। साथ ही उन्होंने लोकसभा में अलग दल के रूप में मान्यता देने का आग्रह किया था।
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दल बदल कानून का भरोसा तृणमूल का कहना है कि इन सांसदों ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव जीता था और किसी अन्य राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ने का उनका फैसला पार्टी की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ने के समान है। ऐसे में दलबदल विरोधी कानून के तहत वे अयोग्य ठहराए जा सकते हैं।