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तमिलनाडु सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनाने से किया मना

By Satish Singh 
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नई दिल्लीं। तमिलनाडु में लंबे समय से चल रहे भाषा के विवाद को लेकर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने नई घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री ने राज्य की नई शिक्षा नीति पर घोषणा करते हुए बताया कि यह नीति राज्य की पहचान को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। स्पष्ट तौर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में केवल दो-भाषा नीति लागू होगी और राष्ट्रीय शिक्षा नीति को नहीं अपनाया जाएगा।
स्टालिन ने अन्ना शताब्दी पुस्तकालय सभागार में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य रटने की बजाय सोचने और समझने की क्षमता विकसित करने वाला होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि अब पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक शिक्षा को भी अहमियत दी जाएगी।

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शिक्षा प्रणाली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर तमिलनाडु सरकार कर रही है विरोध

मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि हमारी शिक्षा नीति में रटकर पास होने की जगह सोचकर सीखने पर जोर हैं।हम दो-भाषा नीति को ही अपनाएंगे और यह हमारी अटल नीति है। बता दें, तमिलनाडु सरकार लंबे समय से केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति का विरोध करती रही है। राज्य सरकार का कहना है कि यह नीति सामाजिक न्याय के खिलाफ है और हिंदी थोपने का एक प्रयास है। इसी कारण राज्य ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का बहिष्कार किया हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगले माह सितंबर से स्मार्ट क्लासेस की शुरूआत हो जाएगी। इससे पढ़ाई और भी आधुनिक और आसान हो जाएगीं स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि स्कूल के हर छात्र को आगे चलकर कॉलेज में एडमिशन मिले। उन्होंने बताया कि अभी 75% छात्र कॉलेज में दाखिला लेते हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य इसे 100% तक ले जाने का है।

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