बिहार में बड़ी संख्या में छात्र आज भी पारंपरिक ग्रेजुएशन कोर्स को सुरक्षित विकल्प मानते हैं। इसके बाद कई युवा UPSC, BPSC, रेलवे, बैंकिंग और दूसरी सरकारी नौकरियों की तैयारी करते हैं। लेकिन महंगी फीस और सीमित संसाधनों के कारण हर छात्र इंजीनियरिंग या महंगे प्रोफेशनल कोर्स नहीं कर पाता। ऐसे में BCA जैसे कोर्स उनके लिए आईटी क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता बन सकते हैं।
BCA के बाद बेंगलुरु में मिली नौकरी
रिपोर्ट के मुताबिक, छोटे कॉलेज से BCA करने के बाद इस युवा को बेंगलुरु में नौकरी मिली। उसकी सालाना सैलरी करीब 35 लाख रुपये बताई गई है। नौकरी शुरू करने के एक महीने से ज्यादा समय बाद उसकी पहली सैलरी आई, जिसके बाद परिवार में खुशी का माहौल है।
यह कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर यह माना जाता है कि बड़े पैकेज के लिए किसी प्रतिष्ठित संस्थान से महंगी पढ़ाई करना जरूरी है। लेकिन आईटी सेक्टर में डिग्री के साथ-साथ कोडिंग स्किल, प्रॉब्लम सॉल्विंग और प्रैक्टिकल नॉलेज भी काफी अहम भूमिका निभाते हैं।
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बिहार के युवाओं के लिए क्या है संदेश?
इस कहानी से यह संकेत मिलता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट के जरिए करियर के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 35 लाख रुपये का पैकेज हर BCA छात्र के लिए सामान्य परिणाम नहीं है। यह एक विशेष सफलता की कहानी है।
आज के दौर में आईटी और सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में कंपनियां केवल डिग्री पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि उम्मीदवार की तकनीकी क्षमता, कोडिंग, समस्या सुलझाने की क्षमता और वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करने के अनुभव को भी महत्व देती हैं।
यही वजह है कि बिहार के छोटे गांव से निकलकर सिर्फ 14 हजार रुपये में BCA करने और फिर लाखों के पैकेज तक पहुंचने वाले इस युवा की कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है।