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इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स ने इजरायल के सैन्य ठिकानों सहित कई हिस्सों पर की जमकर गोलाबारी

By Satish Singh 
Updated Date

Members of the Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) attend an exercise in southern Iran, in this handout image obtained on February 16, 2026. IRGC/WANA (West Asia News Agency)/Handout via REUTERS ATTENTION EDITORS - THIS PICTURE WAS PROVIDED BY A THIRD PARTY.

नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल द्धारा मिलकर ईरान पर किए गए हमले पर इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स जवाबी हमला किया। आईआरजीसी ने अमेरिका और इज़रायल के हवाई ड्रोन इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ इलाके के कई हिस्सों में उनकी सेनाओं के ठिकानों को निशाना बनाया है। IRGC की ओर से जारी बयान के अनुसार 29 मार्च को घोषणा की कि ट्रू प्रॉमिस 4 ऑपरेशन की 86वीं लहर रविवार तड़के कई चरणों में शुरू की गई। इसमें IRGC की एयरोस्पेस फोर्स और नौसेना ने मिलकर इलाके में अमेरिका और इज़रायल के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए।

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आईआरजीसी बयान के मुताबिक ऑपरेशन के पहले चरण में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने अमेरिका के ठिकानों, जिनमें विक्टोरिया आरिफजान और अल खर्ज शामिल हैं। हवाई और ड्रोन ऑपरेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ हथियारों के ज़खीरों को निशाना बनाया। IRGC ने आगे कहा कि बाद के चरणों में अमेरिका और इज़रायल की सेनाओं के आतंकवादी दस्तों के ठिकानों के साथ-साथ कोमाला समूह से जुड़े लोगों को भी कई इलाकों में सटीक निशाना बनाया गया। इन इलाकों में अराद, नेगेव, तेल अवीव, एरबिल, अमेरिका का पांचवां बेड़ा और अल धफरा शामिल हैं। पूरे इलाके में उठते धुएं के गुबार और धमाकों की आवाज़ों, तथा लाखों डॉलर के अमेरिकी विमानों के मलबे की तस्वीरों ने, इलाके में अमेरिका के सहयोगी देशों के अधिकारियों और मीडिया संस्थानों की उन कोशिशों को नाकाम कर दिया है, जिनके ज़रिए वे ईरान के हमलों की खबरों को दबाना चाहते थे। इस्लामिक क्रांति के नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के साथ-साथ कई वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और आम नागरिकों की 28 फरवरी को हुई हत्या के बाद से अमेरिका और इज़रायल की सरकार ने ईरान के खिलाफ एक बड़े पैमाने पर, बिना किसी उकसावे के सैन्य अभियान शुरू कर दिया था। इन हमलों में पूरे ईरान में सैन्य और नागरिक, दोनों तरह के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए गए, जिससे भारी जान-माल का नुकसान हुआ और इंफ्रास्ट्रक्चर को भी व्यापक क्षति पहुंची। इसके जवाब में, ईरान की सशस्त्र सेनाओं ने जवाबी कार्रवाई करते हुए, कब्ज़े वाले इलाकों और क्षेत्रीय ठिकानों पर मौजूद अमेरिका और इज़रायल के ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन की लहरों से निशाना बनाया है।

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