पर्दाफाश न्यूज़ ब्यूरो महराजगंज :: विश्व धरोहर स्थल लुंबिनी में कथित भ्रष्टाचार का मामला मंगलवार को नेपाल की प्रदेश विधानसभा में जोरदार तरीके से उठा। पूर्व मंत्री एवं विधायक चंद्रकेश ‘सी.के.’ गुप्ता ने लुंबिनी विकास कोष पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण कार्यों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं और सरकारी धन का भारी दुरुपयोग हुआ है।
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सदन में मुद्दा उठाते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भ्रष्टाचार पर जल्द रोक नहीं लगाई गई तो एक सप्ताह के भीतर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
50 लाख रुपये के दुरुपयोग का आरोप
विधायक सी.के. गुप्ता ने बताया कि पश्चिम बिहार क्षेत्र में एक अयोग्य ठेकेदार को 150 कमरों के निर्माण का कार्य सौंपा गया, जिसमें करीब 50 लाख रुपये की गड़बड़ी की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि माया देवी मंदिर एवं उसके गुम्बद निर्माण में भी भ्रष्टाचार हुआ है।
उन्होंने कहा कि इन अनियमितताओं का विवरण लुंबिनी विकास कोष द्वारा यूनेस्को व पुरातत्व विभाग को भेजा गया, जिसकी जानकारी कोष के अधिकारियों को पहले से थी, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
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अयोग्य ठेकेदार को ठेका, ग्रामीणों से दुर्व्यवहार
सी.के. गुप्ता ने आरोप लगाया कि बिना आवश्यक योग्यता व अनुभव वाले ठेकेदार को कार्य आवंटित कर चहेतों को लाभ पहुंचाया गया, वहीं स्थानीय ग्रामीणों और धर्मगुरुओं के साथ कोष द्वारा लगातार प्रताड़ना की गई। यही वजह रही कि हाल ही में स्थानीय लोगों ने लुंबिनी मंदिर परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया था।
दान सामग्री गायब, पारदर्शिता पर सवाल
उन्होंने सदन को बताया कि विदेशी पर्यटक मंदिर में सोना-चांदी सहित बहुमूल्य सामग्री का दान करते हैं, लेकिन उसका कोई पारदर्शी लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। कई दान सामग्री गायब है और प्रदेश सरकार को भी उनका पूरा रिकॉर्ड नहीं दिया जाता। इस पूरे मामले के लिए उन्होंने लुंबिनी विकास कोष को जिम्मेदार ठहराया और मंदिर में वीआईपी व्यवस्था समाप्त करने की मांग रखी।
पर्यटकों की सुविधा हेतु मांग
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विधायक ने नेपाल सरकार से सोनौली सीमा के अलावा लुंबिनी क्षेत्र में तीसरे देशों के नागरिकों के प्रवेश के लिए कालीदह में आव्रजन कार्यालय स्थापित करने की मांग की, ताकि पर्यटकों को आने-जाने में सुविधा मिल सके। साथ ही लुंबिनी आने वाले पर्यटकों के लिए भंसार (कस्टम) प्रक्रिया सरल बनाने पर भी जोर दिया।
सदन में उठाए गए इन आरोपों के बाद लुंबिनी विकास कोष की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं, वहीं स्थानीय निवासियों और धार्मिक संगठनों ने सरकार से उच्च स्तरीय जांच की अपेक्षा जताई है।