India Delimitation Controversy : संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण कानून- नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करने के लिए तीन संशोधन विधेयक पेश किए जाने की बात कही जा रही है। लेकिन, देश की सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि इन तीनों विधेयकों का मकसद महिला आरक्षण नहीं, बल्कि परिसीमन है। पार्टी ने परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
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कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक्स पर लिखा, ” लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं। ऊपर से इन्हें महिला आरक्षण के रूप में प्रस्तुत और प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इनके मूल में परिसीमन का मुद्दा है। परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, जो कुछ अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को लाभ पहुंचाती हैं, जहां फिलहाल भाजपा मजबूत है। इससे लोकसभा में कई राज्यों की सापेक्ष शक्ति वास्तव में कम हो जाएगी। असम और जम्मू-कश्मीर में जिस तरह से परिसीमन किया गया है, वह दिखाता है कि मोदी-शाह की जोड़ी कितने खतरनाक तरीके से काम करती है। इन विधेयकों का असली उद्देश्य और विषय-वस्तु छल-कपट से भरी है, और इनका प्रभाव बेहद व्यापक और नुकसानदेह है। इन्हें उनके वर्तमान स्वरूप में पूरी तरह खारिज किया जाना चाहिए।”
कांग्रेस सांसद रमेश ने आगे लिखा, “विपक्ष की मांग सरल है: लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, साथ ही अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आने वाली महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। 2023 में भी विपक्ष का यही रुख था और आज भी यही है। यही असली सत्ता में भागीदारी है, जो कहीं अधिक लोकतांत्रिक है और संवैधानिक मूल्यों एवं सिद्धांतों के अनुरूप है।”
लोकसभा में तीन विधेयक पेश किए जा रहे हैं। ऊपर से इन्हें महिला आरक्षण के रूप में प्रस्तुत और प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन इनके मूल में परिसीमन का मुद्दा है।
परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर देशभर से कई गंभीर चिंताएं सामने आई हैं, जो कुछ अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को लाभ पहुंचाती…
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— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 16, 2026
बता दें कि सरकार ने विशेष सत्र में लोकसभा में पेश किए जाने वाले तीन संशोधन बिलों की सूची जारी की है। जिनमें पहला बिल- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 है। जिसका मकसद दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तय करना है। दूसरा बिल- संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 है। इसका मकसद जनसंख्या की नई परिभाषा, बढ़ती आबादी के मद्देनजर संसद में सदस्यों की संख्या को बढ़ाना है। तीसरा बिल- परिसीमन विधेयक 2026 है। जिसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है। सीटों का फिर से निर्धारण होगा।