नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को मंजूरी मिलने के 24 घंटे के अंदर ही महाराष्ट्र की शिंदे मंत्रीमंडल की बैठक ने इस स्कीम को मंजूरी दे दी है। शिंदे सरकार (Shinde Government) के इस फैसले के साथ ही अब राज्य में न्यू पेंशन स्कीम (NPS) की जगह यूपीएस लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।
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बता दें कि केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सबसे बड़ा फैसला एकीकृत पेंशन योजना (UPS) को लेकर रहा। सरकारी कर्मचारियों के लिए लाई गई इस योजना में कई बड़े एलान हैं। यूपीएस (UPS) की सबसे बड़ी खास बात यह है कि इसमें पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) की तरह ही सरकारी कर्मियों को रिटायरमेंट के बाद औसत मूल वेतन की 50 फीसदी राशि मिलेगी। हालांकि, इसके लिए कई मानक और नियम भी तय किए गए हैं।
यूपीएस योजना 1 अप्रैल 2025 से होगी लागू
50 फीसदी की सुनिश्चित पेंशन
यूपीएस अपनाने पर सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। इसकी रकम सेवानिवृत्ति से पहले के 12 महीने के औसत मूल वेतन का 50 फीसदी होगी। 25 वर्ष तक की सेवा पर ही यह रकम मिलेगी। 25 वर्ष से कम और 10 साल से ज्यादा की सेवा पर उसके अनुपात में पेंशन मिलेगी।
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पारिवारिक पेंशन
किसी भी कर्मचारी के निधन से पहले पेंशन की कुल रकम का 60 फीसदी हिस्सा परिवार को मिलेगा।
न्यूनतम पेंशन
कम से कम 10 साल की सेवा के बाद 10 हजार रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम पेंशन सुनिश्चित होगी। महंगाई भत्तों को जोड़कर आज के हिसाब से यह रकम 15 हजार रुपये के आसपास होगी।
महंगाई दर के साथ इंडेक्सेशन
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उपरोक्त तीनों तरह की पेंशन यानी सुनिश्चित पेंशन, पारिवारिक पेंशन और न्यूनतम पेंशन के मामलों में महंगाई राहत यानी DR के आधार पर इनफ्लेशन इंडेक्सेशन मिलेगा।
सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी के अतिरिक्त एकमुश्त भुगतान
छह महीने की सेवा के लिए (वेतन+डीए) की 10 फीसदी रकम का एकमुश्त भुगतान होगा। यानी अगर किसी की 30 साल की सर्विस है तो उसे छह महीने की सेवा के आधार पर एकमुश्त भुगतान (इमॉल्यूमेंट) होगा। सभी राज्यों ने लागू किया तो 90 लाख सरकारी कर्मियों को होगा फायदा
23 लाख कर्मचारियों को फायदा, एनपीएस और यूपीएस का विकल्प
केंद्र सरकार के 23 लाख कर्मचारियों को इसका फायदा मिलेगा। कोई एनपीएस में रहना चाहे तो उसमें रह सकता है। अगर यूपीएस अपनाना चाहे तो इसका विकल्प चुन सकता है। राज्य सरकारें भी इस संरचना को चुन सकती है। अगर राज्य सरकार के कर्मचारी इसमें शामिल होते हैं तो 90 लाख कर्मियों को इसका फायदा मिलेगा।