लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है। सत्तापक्ष और विपक्ष के नेता सदन में अपनी अपनी बातें रख रहे हैं। सत्तापक्ष के नेताओं की तरफ से सरकार की खूबियों को गिनाया जा रहा है तो विपक्षी दल के नेता अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्षी दल के नेताओं ने कानून-व्यवस्था, जल जीवन मिशन समेत अन्य योजनाओं पर सवाल खड़े किए।
पढ़ें :- जन आक्रोश महिला पदयात्रा : CM योगी, बोले - विपक्ष ने अपनी महिला विरोधी छवि बदलने के मौके का दुरुपयोग किया
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने जनप्रतिनिधियों का फोन नहीं उठाने के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि, एसपी कभी फोन उठा लेते हैं लेकिन थानेदार कभी फोन नहीं उठाते। उन्होंने आरोप लगाया कि, थानेदार बैठकर दलालों से गप्प लड़ायेंगे लेकिन फोन नहीं उठायेंगे। उन्होंने कहा कि कार्यपालिका का विधायिका पर हावी होना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। इस संदर्भ में उन्होंने पीठ से हस्तक्षेप की मांग की और कहा कि सदन की गरिमा की अवहेलना हो रही है।
उत्तर प्रदेश-
नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडेय !! pic.twitter.com/y1eQOJyYtd
— Gaurav Singh Sengar (@sengarlive) February 17, 2026
पढ़ें :- महिलाओं के गुस्से और श्राप से सपा-कांग्रेस भस्म हो जाएगी : डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्या
वहीं, इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि हमने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया है कि सभी जनप्रतिनिधियों के फोन उठाएं। जो लोग फोन नहीं उठाते, हम उनके साथ नहीं हैं। इसके लिए हमने शासनादेश जारी किया है।
समाजवादी पार्टी के विधायक कमाल अख़्तर ने भी कहा कि स्थिति ऐसी हो गई है कि सत्ता पक्ष के विधायकों को भी धरने पर बैठना पड़ता है। उन्होंने कहा कि अधिकारी किसी की सुनवाई नहीं करते, जिससे सभी दलों के विधायक परेशान हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे जिससे नौकरशाही पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।