ये सच है की आँखें की हमारी सुंदरता में मुख्य भूमिका निभाती हैं । इसके साथ ही आइब्रो आंखों को और भी आकर्षक बनाती हैं। इसे एक सुंदर आकार देने के लिए थ्रेडिंग और वैक्सिंग आइब्रो लोकप्रिय तरीके हैं। वहीं कई लोग दोनों के अंतर को लेकर कन्फ्यूज रहते हैं कि दोनाें में कौन सा तरीका बेस्ट है। तो आज मैं आपके इस प्रॉबलम की सोल्यूसन लाई हूँ।
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थ्रेडिंग के फायदे और नुकसान
थ्रेडिंग करवाने से आप अपनी पसंद का शेप पा सकती हैं। खासकर तब, जब आप डिफाइन की हुई आईब्रो चाहती हैं। ये सेंसिटिव स्किन वालों के लिए सबसे अच्छा तरीका हो सकता है, क्योंकि इसमें उनकी स्किन पर किसी भी तरह का केमिकल नहीं इस्तेमाल किया जाता है। थ्रेडिंग करवाने से छोटे-छोटे बाल आसानी से निकल जाते हैं। हाँ ये सच है की आपको थ्रेडिंग करवाने के लिए थोड़ी प्रॉबलम सहनी पड़ेगी। जैसे की बाल निकलवाते समय थोड़ी चुभन या दर्द महसूस हो सकता है। साथ ही जलन या रेडनेस की दिक्कत भी हो सकती है।
वैक्सिंग कराने के फायदे और नुकसान
ये आसानी से कुछ ही सेकंड में बालों को निकाल देता है। ये एक फास्ट प्रॉसेस होता है। बता दें वैक्सिंग करवाने से बाल भी देर से निकलते हैं। ये डेड स्किन सेल्स को भी हटा देता है। हालांकि, जिनकी त्वचा कोमल है, उनके लिए ये नुकसानदायक हो सकता है। स्किन भी डैमेज हो सकती है।
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दोनों में से क्या है सही तरीका?
अगर आप इन दोनों में कन्फ्यूज हैं ताे हम आपको बता दें कि अगर आपकी स्किन बहुत नाजुक यानी कि कोमल है तो आपके लिए थ्रेडिंग बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, अगर आपके आइब्रो के बाल मोटे हैं और स्किन भी ज्यादा सेंसिटिव नहीं है तो वैक्सिंग बेहतरीन रहेगा।