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पश्चिम बंगाल में मुख्य सचिव समेत टॉप अधिकारियों को हटाने पर टीएमसी आग बबूला, राज्यसभा से किया वॉकआउट

By संतोष सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सदस्यों ने निर्वाचन आयोग (Election Commission) के तरफ से पश्चिम बंगाल के शीर्ष अधिकारियों को पद से हटाए जाने का विरोध करते हुए सदन से बहिर्गमन किया है। राज्यसभा में शून्यकाल शुरू होने पर तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन (Trinamool Congress’s Derek O’Brien) ने यह मुद्दा उठाया और कहा कि निर्वाचन आयोग ने देर रात पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को पद से हटा दिया।

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उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आयोग के इस कदम का विरोध करती है और दिन भर के लिए सदन से बहिर्गमन कर रही है। इस पर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू (Minister of Parliamentary Affairs Kiren Rijiju) ने तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग (Election Commission) एक संवैधानिक निकाय है और उसके फैसले से सरकार का कोई लेनादेना नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान में निर्वाचन आयोग (Election Commission) को अधिकार दिया गया है और उसके फैसले को सदन में उठाने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे मुद्दे उठाना सदन के समय का दुरुपयोग है।

मुख्य सचिव को हटाया

उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी संवैधानिक निकायों पर हमला करती रहती है। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के महज कुछ ही घंटों बाद निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने ममता बनर्जी सरकार (Mamata Banerjee Government) के दो शीर्ष अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया था, जिनमें मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती भी शामिल हैं।

आयोग ने 1993 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी दुष्यंत नरियाला को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया और कहा कि नंदिनी चक्रवर्ती को चुनाव संबंधी कार्यों से दूर रखा जाएगा। आयोग ने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को भी उनके पद से हटा दिया। आयोग ने रविवार रात राज्य सरकार को भेजे एक पत्र में 1997 बैच की आईएएस अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों की प्रधान सचिव नियुक्त करने का निर्देश दिया।

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आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा (Commission Secretary Sujit Kumar Mishra) के हस्ताक्षर वाले पत्र के मुताबिक,जिन अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, उन्हें चुनाव संपन्न होने तक किसी भी चुनाव संबंधी पद पर तैनात नहीं किया जाएगा।’ आयोग ने कहा कि राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया। आयोग ने कहा निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट सोमवार अपराह्न तीन बजे तक भेजी जाए।

पश्चिम बंगाल में यह प्रशासनिक फेरबदल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा राज्य में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास को लेकर आयोग की लगातार आलोचना के मद्देनजर किया गया। राज्य के राजनीतिक हलकों के कुछ वर्गों का मानना ​​है कि यह कदम चुनावों के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा और मतगणना चार मई को होगी।

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