Tulsi Gabbard : अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुलसी गबार्ड को राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी का निदेशक चुना है। यह पद देश की खुफिया एजेंसियों के शीर्ष पर होता है और राष्ट्रपति के मुख्य खुफिया सलाहकार के रूप में कार्य करता है। गबार्ड का राजनीतिक और सैन्य करियर अद्वितीय है, साथ ही अमेरिकी विदेश नीति पर उनके विचार भी मुखर हैं। तुलसी ने 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति चुनाव के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। लेकिन बाद में अपना नाम वापस ले लिया था। उन्होंने 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ दी थी। तुलसी हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी में शामिल हो गई थीं और राष्ट्रपति चुनाव में खुलकर ट्रंप का समर्थन किया था।
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तुलसी प्राउड हिंदू हैं और अक्सर पाकिस्तान और बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार की निंदा करती हैं। गबार्ड अपनी हिंदू आस्था के बारे में खुलकर बोलती रही हैं और 2013 में उन्होंने भगवद् गीता पर हाथ रखकर शपथ लेकर इतिहास रच दिया था। वह खुफिया मामलों पर व्हाइट हाउस की सलाहकार भी होंगी और अमेरिका की 18 जासूसी एजेंसियों का कामकाज देखेंगी।
गबार्ड दो दशकों से ज़्यादा समय तक अमेरिकी सेना के राष्ट्रीय रक्षक दल की सदस्य रहीं। उन्होंने इराक और कुवैत दोनों में सैन्य अभियानों में प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त किया। उल्लेखनीय है कि उन्होंने दो साल तक होमलैंड सिक्योरिटी पर हाउस कमेटी में काम किया।
New Director Intelligence of USA
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तुलसी गबार्ड ने अरबपति एलन मस्क के साथ एक एग्रीमेंट किया था। इस एग्रीमेंट के तहत तुलसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक शो को होस्ट करेंगी। इस शो के जरिए अभिव्यक्ति की आजादी की पैरवी की जाएगी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X तीन नए शो लेकर आ रहा है, जिनकी मेजबानी तुलसी गबार्ड, सीएनएन के पूर्व एंकर डॉन लेमन और स्पोर्ट्स रेडियो कमेंटेटर जिम रोम करेंगे। तुलसी का नया शो डॉक्यूमेंट्री स्टाइल के वीडियो और कंटेंट की व्यापक सीरीज पेश करेगा। तुलसी का नया शो डॉक्यूमेंट्री-स्टाइल वीडियो और कंटेंट की एक विस्तृत श्रृंखला पेश करेगा। तुलसी का कहना है कि वह उन लोगों की कहानियां साझा करेंगी जिनकी आवाज दबा दी गई है और सत्ता में बैठे लोग उनकी आवाज दबाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है।