लखनऊ। यूपी विधानमंडल का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया है। नेता सदन सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से जनहित के मुद्दों पर सार्थक बहस और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। सत्र में भाग लेने सदन में जाने से पहले सीएम योगी ने संवाददाताओं को संबोधित किया। इस दौरान साथ में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, वित्त व संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना भी मौजूद रहे।
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सत्र के पहले दिन विधानसभा में शोक प्रस्ताव रखा गया। बता दें कि आजमगढ़ की निजामाबाद सीट से सपा विधायक आलमबदी का 23 जुलाई को निधन हो गया था, इसलिए पहले दिन की कार्यवाही शोक प्रस्ताव के बाद स्थगित कर दी जाएगी। वहीं, विधान परिषद में सोमवार को कार्यवाही होगी। मानसून सत्र चार दिन यानी छह अगस्त तक चलने की संभावना है। सरकार पिछले सत्र के बाद से अब तक नौ अध्यादेश ला चुकी है। इन अध्यादेशों के स्थान पर सरकार अब इनके प्रतिस्थानी विधेयक तथा कुछ नए विधेयक भी इस सत्र में ला सकती है।
विधानसभा में 4 अगस्त को अनुपूरक बजट आएगा। सरकार कुछ जरूरी कामों के लिए अनुपूरक बजट लेकर आ रही है। विधानमंडल का मानसून सत्र काफी छोटा होगा। प्रमुख सचिव विधानसभा प्रदीप दुबे द्वारा 6 अगस्त तक का कार्यक्रम जारी किया गया है। सरकार अनुपूरक बजट के साथ जहां कुछ विधेयक पास कराना चाहती है, वहीं विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी और पेपर लीक मामले पर सरकार से जवाब मांगेगा। विपक्ष ने सरकार को घेरने की पूरी तैयारी की है। माना जा रहा है कि सदन के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया जाएगा।
विधानसभा में दूसरे दिन चार अगस्त को औपचारिक काम के साथ ही अध्यादेशों को रखा जाएगा। कुछ विधेयकों का पुरस्थापन के लिए रखा जाएगा। सरकार की ओर से 12.20 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट को प्रस्तुत किया जाएगा। पांच अगस्त को विधायी कार्य होंगे। छह अगस्त को अनुपूरक बजट पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि इसी दिन नेता सदन मुख्यमंत्री अनुपूरक बजट पर सरकार का पक्ष रखेंगे।
इस सत्र में पहली बार सदन में ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण गायन किया जाएगा। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन लोकतांत्रिक विमर्श का सर्वोच्च मंच है। सभी दलों के सहयोग से सदन की कार्यवाही निर्बाध रूप से चलती है। चार दिवसीय इस विधानमंडल सत्र के दौरान अनेक महत्वपूर्ण विधायी एवं वित्तीय कार्य संपन्न किए जाएंगे। बैठक में संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि सदन का सुचारू संचालन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सहयोग से ही संभव है। उन्होंने कहा कि सभी दलों द्वारा सदन की कार्यवाही के शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित संचालन का आश्वासन देना लोकतांत्रिक परंपराओं को और सुदृढ़ करेगा।