लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने जा रही है। रविवार दोपहर लखनऊ के लोकभवन में नए मंत्री शपथ लेंगे। शनिवार शाम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात की, जिसके बाद विस्तार की तस्वीर लगभग साफ हो गई।
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इस बार बीजेपी का पूरा फोकस सामाजिक और जातीय संतुलन पर नजर आ रहा है। पार्टी ब्राह्मण, जाट, दलित, पासी, वाल्मीकि, लोधी और अति पिछड़े वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि कैबिनेट में खाली पड़े सभी पद भरे जा सकते हैं।
कई नए चेहरों को मिल सकती है जगह
रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडे का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। कभी समाजवादी पार्टी के बड़े नेताओं में गिने जाने वाले मनोज पांडे लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के करीब आ गए थे। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पार्टी उन्हें अहम मान रही है। राजनीति विज्ञान में पीएचडी कर चुके पांडे लंबे समय से सक्रिय राजनीति में हैं और कई बार विधायक रह चुके हैं। पश्चिम यूपी के बड़े जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी को भी मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। वे बीजेपी संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और पहले पंचायती राज मंत्री भी रह चुके हैं। जाट समुदाय में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
फतेहपुर की खागा सीट से विधायक कृष्णा पासवान का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है। पासी समाज से आने वाली कृष्णा पासवान दलित राजनीति का मजबूत चेहरा मानी जाती हैं। बीजेपी उन्हें दलित वोट बैंक को मजबूत करने के लिए आगे बढ़ा रही है। वहीं अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर को वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि के तौर पर देखा जा रहा है। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। दूसरी तरफ कन्नौज के तिर्वा से विधायक कैलाश राजपूत लोधी समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं और कई बार विधायक रह चुके हैं।
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प्रमोशन भी तय माना जा रहा
सूत्रों के मुताबिक मौजूदा राज्य मंत्री सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल का कद भी बढ़ सकता है। पश्चिम यूपी से आने वाले सोमेंद्र तोमर को कैबिनेट या स्वतंत्र प्रभार मिल सकता है, जबकि अजीत पाल को ओबीसी चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाने की तैयारी है। वाराणसी से एमएलसी हंसराज विश्वकर्मा का नाम भी चर्चा में बना हुआ है। उन्हें पूर्वांचल में अति पिछड़े वर्ग के बड़े चेहरे के तौर पर देखा जाता है और संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।
फिलहाल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों डिप्टी सीएम समेत सरकार में कुल 54 मंत्री हैं। नियम के अनुसार यूपी में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में यह विस्तार सिर्फ मंत्रियों की संख्या बढ़ाने भर का मामला नहीं, बल्कि 2027 चुनाव से पहले बीजेपी की बड़ी राजनीतिक और सामाजिक रणनीति माना जा रहा है।