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UP Election : माया का फैसला कहीं न साबित हो आत्मघाती गोल, पश्चिमी यूपी के तीन नेताओं का निष्कासन बिगाड़ सकता बसपा का समीकरण

By santosh singh 
Updated Date

लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती (Mayawati) ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए तीन वरिष्ठ नेताओं को निष्कासित कर दिया है। मायावती (Mayawati) ने जिन तीन नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाया है, उसमें धर्मवीर अशोक, जयप्रकाश और सरफराज रैन शामिल हैं। इस फैसले के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और पार्टी के अंदर असंतोष की स्थिति भी देखने को मिल रही है।

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पश्चिमी यूपी में कांशीराम युग से जुड़े रहे धर्मवीर अशोक

निष्कासित किए गए नेताओं में पूर्व मंत्री धर्मवीर अशोक और जयप्रकाश प्रमुख नाम हैं। दोनों नेताओं की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मजबूत राजनीतिक पकड़ मानी जाती है। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका और जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव के कारण उन्हें काफी प्रभावशाली नेता माना जाता था। धर्मवीर अशोक की पहचान बसपा संस्थापक कांशीराम (BSP Founder Kanshi Ram) के करीबी सहयोगियों में होती रही है। उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए कई राज्यों में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनकी अचानक पार्टी से विदाई को बसपा के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, खासकर पश्चिमी यूपी में।

जयप्रकाश की वापसी और फिर निष्कासन, संगठनात्मक विवाद बना वजह

जयप्रकाश की बसपा में कुछ समय पहले ही वापसी हुई थी। वापसी के बाद उन्होंने संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई और युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया। उन्हें केरल जैसे राज्यों में चुनावी जिम्मेदारी भी दी गई थी। लेकिन बाद में संगठनात्मक मतभेदों के चलते उन पर कार्रवाई की गई। सूत्रों के अनुसार, जयप्रकाश पर पश्चिमी यूपी में संगठन के कार्यों में दखल देने के आरोप लगे थे। कहा जा रहा है कि पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से मतभेद और कार्यशैली को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी इस फैसले की बड़ी वजह बनी।

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टिकट वितरण पर पड़ सकता है असर

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बसपा ने पहले ही टिकट वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। कई जिलों में प्रभारी नियुक्त किए जा चुके हैं। धर्मवीर अशोक, जयप्रकाश और सरफराज राईन की टिकट वितरण में अहम भूमिका थी। उनके निष्कासन के बाद चुनावी रणनीति पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

चुनावी समीकरण बिगड़ने की आशंका, पुराने नेताओं की वापसी मुहिम को झटका

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन नेताओं की पकड़ को देखते हुए माना जा रहा है कि उनके निष्कासन से पार्टी का जमीनी नेटवर्क कमजोर हो सकता है। इससे आगामी चुनावों में बसपा की रणनीति और संगठनात्मक ताकत पर सीधा असर देखने को मिल सकता है। बसपा द्वारा हाल ही में पुराने नेताओं को फिर से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। लेकिन इस बड़े फैसले के बाद इस मुहिम को झटका लगा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम पार्टी के भीतर अनुशासन और नियंत्रण बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

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