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‘वंदे मातरम्’ विवाद: गृहमंत्री बोले-कांग्रेसियों में अगर जरा भी शर्म बची है, तो उन्हें बंकिम बाबू की अमर आत्मा से माफी मांगनी चाहिए

By शिव मौर्या 
Updated Date

नई दिल्ली। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अटल बिहार वाजपेयी जी की पुण्यतिथि पर राजस्थान के निम्बाहेड़ा में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया। साथ ही, राजस्थान सरकार के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा, सैकड़ों वर्षों से राजस्थान की वीर भूमि देशभर के देशभक्तों के लिए वीरता की काशी रही है। इसी भूमि ने मुगलों को यह संदेश दिया कि हमें कोई झुका नहीं सकता।

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गृहमंत्री ने कहा, आज अटल जी की पुण्यतिथि है, उनकी स्मृति में आज चित्तौड़गढ़ (राजस्थान) इस पवित्र भूमि पर उनकी प्रतिमा और भव्य स्मारक बनाने का कार्य भाजपा के कार्यकर्ताओं ने किया है। अटल जी के व्यक्तित्व के अनुरूप बनी इस भव्य प्रतिमा के कार्य से जुड़े हर एक कार्यकर्ता को साधुवाद।

उन्होंने कहा, आजादी के 80 साल बाद लाल किले की प्राचीर पर और देशभर में जहां-जहां ध्वजारोहण हुआ, वहां पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गान हुआ। वोट बैंक के लालच में कांग्रेस ने वंदे मातरम् को भुला दिया था। ‘वंदे मातरम्’ के 150वां वर्ष में मोदी जी ने लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ को फिर से नया आयुष्य दिया है।

गृहमंत्री ने कहा, कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय पर वंदे मातरम् का गान हो रहा था। सोनिया जी ने कांग्रेस अध्यक्ष को वंदे मातरम् बीच में रोकने के लिए कहा। 80 साल बाद बंकिम बाबू का यह अमर गान जब फिर से सम्मान प्राप्त कर रहा है, तो वह भी सोनिया जी को रास नहीं आया। सोनिया जी, जनता आपको देख रही है और आपके द्वारा किए गए इस पाप के लिए जनता आपको कभी माफ़ नहीं करेगी। कांग्रेसियों में अगर जरा भी शर्म बची है, तो उन्हें बंकिम बाबू की अमर आत्मा से माफी मांगनी चाहिए।

अटल जी ने सिद्धांतों से नहीं किया कभी समझौता
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, अटल जी बाल्यकाल से ही राष्ट्रभक्ति के रास्ते पर चले। वे RSS के प्रचारक बने, जनसंघ के कार्यकर्ता बने और मात्र 33 वर्ष की आयु में बलरामपुर से सांसद बने। 1957 से 1996 तक, लगभग 40 वर्षों तक वे विपक्ष में रहे, मगर उनका विचार सदैव राष्ट्र प्रथम का रहा। वे जेल भी गए, लाठियां भी खाईं और कांग्रेस के अत्याचार भी सहे, लेकिन कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया:

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