West Bengal Mosque Loudspeaker Controversy: पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने का मुद्दा अब राजनीतिक तकरार का नया केंद्र बनता नजर आ रहा है। इस मामले को लेकर मुर्शिदाबाद के सांसद अबू ताहिर खान और जंगीपुर के सांसद खलीलुर रहमान ने शनिवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। दोनों सांसदों ने धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाए जाने पर चिंता जताते हुए सरकार से कार्रवाई रोकने की अपील की। बैठक के बाद अबू ताहिर खान ने आरोप लगाया कि राज्य में मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट किया गया कि कार्रवाई किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं है, बल्कि हाई कोर्ट के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों के तहत की जा रही है।नबन्ना में हुई इस मुलाकात में सांसदों ने मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दे मुख्यमंत्री के सामने रखे। पहला मुद्दा मतदाता सूची से जुड़े SIR को लेकर था और दूसरा धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का। अबू ताहिर खान के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 27 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं और बड़ी संख्या में मामले अभी ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं। उन्होंने दावा किया कि इन लोगों में बड़ी संख्या कामकाजी वर्ग और ऐसे लोगों की है, जिन्हें सरकारी कागजी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है। सांसद का कहना था कि कई मामलों में नाम या अक्षर की छोटी-मोटी गलतियों के कारण लोगों के नाम सूची से हट गए हैं।
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अबू ताहिर खान ने मुख्यमंत्री से मांग की कि इन लोगों के नाम दोबारा शामिल किए जाएं और जिन लोगों के मामले लंबित हैं, उनकी सुनवाई जल्द कराई जाए। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 27 लाख प्रभावित लोगों में से लगभग सात लाख लोगों ने सुनवाई के लिए आवेदन किया है, जबकि करीब 20 लाख लोग अभी तक अपील नहीं कर पाए हैं। सांसद ने सरकार से मांग की कि बाकी लोगों के लिए भी आवेदन करने की समय सीमा बढ़ाई जाए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को अदालत के सामने ले जाया जा सकता है।सांसदों का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटने का असर केवल चुनावी अधिकार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लोगों को सरकारी योजनाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ लेने में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
बैठक का दूसरा और ज्यादा संवेदनशील मुद्दा मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल का रहा। अबू ताहिर खान ने कहा कि मस्जिदों में अजान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर हटाए जाना उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से कार्रवाई रोकने की अपील करते हुए कहा कि धार्मिक गतिविधियों में अनावश्यक बाधा नहीं आनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा ध्वनि प्रदूषण से संबंधित कानूनों का पालन करने के लिए तैयार हैं।मुख्यमंत्री की ओर से कथित तौर पर यह स्पष्ट किया गया कि लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई किसी एक धर्म या समुदाय को निशाना बनाकर नहीं की जा रही है। हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम लागू किए जा रहे हैं। अबू ताहिर खान के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उन्हें यह भी याद दिलाया कि इस संबंध में आदेश पहले ही जारी हो चुका था और उस समय राज्य में मौजूदा सरकार सत्ता में थी। ऐसे में अब इस कार्रवाई पर सवाल उठाने से पहले पुराने आदेशों और कानूनी प्रक्रिया को भी देखना चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक करीब 3,500 लाउडस्पीकर हटाए जाने की बात सामने आई है। इनमें लगभग 1,200 मंदिरों से जुड़े लाउडस्पीकर भी शामिल बताए गए हैं। सरकार का यही तर्क है कि कार्रवाई किसी एक धार्मिक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि नियमों के आधार पर सभी धार्मिक स्थलों पर लागू की जा रही है। इसके बावजूद मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाए जाने को लेकर मुस्लिम समुदाय के कुछ नेताओं और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बनी हुई है।इस मुद्दे को लेकर इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी सवाल उठाए हैं। मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की कार्रवाई के तरीके को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर बिना लिखित आदेश के पुलिस कार्रवाई कर रही है। इससे मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित न रहकर राजनीतिक विवाद में भी बदलता दिखाई दे रहा है।खास बात यह है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात से पहले दोनों सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात कर चुके हैं। शुक्रवार को अबू ताहिर खान और खलीलुर रहमान ने प्रधानमंत्री आवास पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ बैठक की थी। ऐसे समय में यह मुलाकात हुई जब दोनों सांसदों के बीजेपी में शामिल होने की अटकलें भी तेज थीं। हालांकि, अबू ताहिर खान ने साफ किया कि वह बीजेपी में शामिल नहीं हो रहे हैं और एनसीपी के साथ बने रहने की बात कही है।
मुर्शिदाबाद के दोनों सांसदों की लगातार दिल्ली और राज्य स्तर पर शीर्ष नेताओं से मुलाकात ने बंगाल की राजनीति में चर्चा को और तेज कर दिया है। एक तरफ SIR को लेकर लाखों नामों का विवाद है, तो दूसरी तरफ धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर हटाने का मुद्दा संवेदनशील राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार आगे इस कार्रवाई को किस तरह लागू करती है और क्या प्रभावित लोगों के लिए SIR से जुड़ी प्रक्रिया में कोई अतिरिक्त राहत दी जाती है। फिलहाल दोनों मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के साथ-साथ मुर्शिदाबाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल की सियासत के केंद्र में आ गया है।