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सावन में रुद्राभिषेक का क्यों होता है खास महत्व, जानिए जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में विशेष अंतर

By Harsh 
Updated Date

क्या आप जानते हैं कि सावन में ही रुद्राभिषेक को इतना खास क्यों माना जाता है? आखिर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर है और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं? आइए जानते हैं इस खास रिपोर्ट में।

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सावन का पावन महीना शुरू होते ही देशभर के अलग-अलग शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ने लगती है। वैसे तो हमेशा ही भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है। लेकिन हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रावण मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता सती ने पुनर्जन्म लेकर माता पार्वती के रूप में सावन मास में ही निराहार रहकर कठोर तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था। वहीं यह मान्यता है कि सावन माह में ही समुद्र मंथन से विष निकला था, जिसे महादेव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया।विष के प्रभाव से शिवजी के शरीर की उष्णता शांत करने के लिए देवी-देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था, यही वजह है कि इस महीने में शिवलिंग पर जल चढ़ाने से लेकर विशेष पूजा और रुद्राभिषेक तक का आयोजन किया जाता है।

मान्यता है कि सावन के दौरान भगवान शिव की पूजा करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। अब बात करते हैं रुद्राभिषेक की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राभिषेक भगवान शिव के रुद्र स्वरूप की विशेष पूजा है। इसमें केवल जल अर्पित नहीं किया जाता, बल्कि वैदिक मंत्रों, खासतौर पर श्रीरुद्रम मंत्रों के उच्चारण के साथ शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, सावन में रुद्राभिषेक का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि इस दौरान भगवान शिव की आराधना को विशेष फलदायी माना जाता है। सावन में रुद्राभिषेक करवाने के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं। माना जाता है कि इससे मन को शांति मिलती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। हालांकि, रुद्राभिषेक को केवल इच्छाओं की पूर्ति का माध्यम नहीं माना जाता, बल्कि इसे भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आत्मिक शुद्धि का एक मार्ग भी माना जाता है।

अब समझते हैं जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में अंतर। जलाभिषेक में भक्त श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। यह शिव पूजा की सरल और प्रचलित विधि है। वहीं, रुद्राभिषेक एक विशेष वैदिक पूजा विधि है, जिसमें मंत्रोच्चारण के साथ भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है। इसमें जल के साथ दूध, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री का भी प्रयोग किया जाता है। यही कारण है कि रुद्राभिषेक को सामान्य अभिषेक से अलग और विशेष माना जाता है।

रिपोर्ट : कल्पना पाण्डे

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