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तमिलनाडु में सूखती फसलें, टूटती उम्मीदें, कावेरी नदी के किनारे रेत में खुद को दफन कर रो पड़े किसान

By Sushil Sah 
Updated Date

तिरुचिरापल्ली। तमिलनाडु में कावेरी जल विवाद को लेकर किसानों ने सिंचाई के लिए कर्नाटक से तुरंत पानी छोड़ने की मांग को लेकर किसानों ने तिरुचिरापल्ली में कावेरी नदी के किनारे रेत में खुद को आधा दफन कर एक बेहद भावुक विरोध प्रदर्शन किया।

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बाढ़ का पानी मिलने से नाराज हैं किसान

आपको बता दें कि राष्ट्रीय दक्षिण भारतीय नदी जोड़ो किसान संघ के प्रदेश अध्यक्ष पी. अय्याकन्नू के नेतृत्व में यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया है कि कर्नाटक सरकार तमिलनाडु के साथ लगातार अन्याय कर रही है। किसान नेताओं ने कहा कि कर्नाटक केवल वही पानी छोड़ता है जो भारी बारिश के कारण उसके जलाशयों में अतिरिक्त होता है। कर्नाटक तमिलनाडु को सिर्फ एक निकास राज्य की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जबकि नियमित रूप से मिलने वाले कानूनी हिस्से का पानी प्रदान नहीं की जा रही है।

कुरुवई फसल बर्बादी की कगार पर

किसानों का कहना है कि कावेरी डेल्टा क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत के कारण उनकी कुरुवई यानी धान की फसलें सूख रही हैं और पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर हैं। साथ ही किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत पानी नहीं मिला तो डेल्टा क्षेत्र के लाखों किसानों के सामने भुखमरी का संकट आ जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट से 1 लाख करोड़ के मुआवजे की मांग

प्रदर्शन के दौरान किसान नेता अय्याकन्नू ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री से विशेष अपील करते हुए यह मांग रखी कि तमिलनाडु सरकार को कर्नाटक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए। पानी न मिलने से किसानों को हुए भारी नुकसान की भरपाई के लिए कर्नाटक सरकार से 1 लाख करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग के लिए याचिका दायर की जानी चाहिए। इसके अलावा किसानों ने कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना का भी कड़ा विरोध किया।

कर्नाटक में भी जारी है विरोध प्रदर्शन

वहीं दूसरी ओर, ‘कावेरी जल नियमन समिति’ के माध्यम से तमिलनाडु को पानी जारी करने के निर्देश के बाद कर्नाटक में भी माहौल काफी गर्म है। कर्नाटक के मांड्या और मैसूरु जिलों में किसान संगठन और कन्नड़ समर्थक दल CWRC के आदेश के खिलाफ सड़कों पर उतरा हैं। कर्नाटक सरकार का तर्क है कि कमजोर मानसून के कारण उनके अपने जलाशयों में पीने के पानी का संकट है, इसलिए वे पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं। नई दिल्ली में होने वाली कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की अहम बैठक से ठीक पहले हुए किसानों के इस ‘रेत समाधि’ प्रदर्शन ने दोनों राज्यों के बीच चल रहे इस दशकों पुराने विवाद को एक बार फिर से उग्र कर दिया है।

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