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Shukra Ast 2026 : सुख-समृद्धि के देवता शुक्र 23 सितंबर से अस्त हो रहे हैं, शुभ कार्य रूक जाते हैं

सुख-समृद्धि के देवता शुक्र देव वैभव, प्रेम, सौंदर्य ,समृद्धि  और सुख-समृद्धि के प्रदाता है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्रदेव को भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम, कला, और वैभव का प्रतीक माना जाता है। शुक्र हमारे जीवन को  प्रभावित करता है।

By अनूप कुमार 
Updated Date

Shukra Ast 2026 :  सुख-समृद्धि के देवता शुक्र देव वैभव, प्रेम, सौंदर्य ,समृद्धि  और सुख-समृद्धि के प्रदाता है। ज्योतिष शास्त्र में शुक्रदेव को भौतिक सुख-सुविधाओं, प्रेम, कला, और वैभव का प्रतीक माना जाता है। शुक्र हमारे जीवन को  प्रभावित करता है।

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वैदिक ज्योतिष की गणना के अनुसार, 23 सितंबर 2026 को रात 08:16 बजे सुख, वैभव और ऐश्वर्य के कारक शुक्र ग्रह अस्त (Shukra Ast 2026) हो रहे हैं। वह करीब 37 दिनों तक इसी अवस्था में रहने के बाद 30 अक्टूबर 2026 को पुनः उदित होंगे। इसके अलावा, अक्टूबर के महीने में ही शुक्र वक्री (उल्टी चाल) भी होने जा रहे हैं, जिससे इस खगोलीय घटना का महत्व और बढ़ जाता है।

शुक्रास्त का सबसे बड़ा असर यह होता है कि इस दौरान सभी मांगलिक कार्य (शुभ आयोजन) रोक दिए जाते हैं। शादियों के अलावा, गृह प्रवेश, मुंडन, नई गाड़ी खरीदने या कोई बड़ा बिज़नेस शुरू करने जैसे कामों से भी पारंपरिक रूप से बचा जाता है।
हिंदू परंपरा में इस समय के दौरान जीवन की बड़ी घटनाओं की योजना न बनाने की सख्त सलाह दी जाती है।

जब शुक्र ग्रह सूर्य से सुरक्षित दूरी पर आ जाता है, तो वह फिर से ‘उदित’ होता है—इस चरण को ‘शुक्र उदय’ कहा जाता है। इस समय पाबंदी हट जाती है और शुभ कार्य तुरंत शुरू किए जा सकते हैं।

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