Ishan Kishan Statement: ईशान किशन को आमतौर पर आक्रामक बल्लेबाजी के लिए जाना जाता है। व्हाइट-बॉल क्रिकेट में उनका अंदाज तेजतर्रार रहा है, लेकिन दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की कप्तानी कर रहे किशन ने रेड-बॉल क्रिकेट को लेकर ऐसी बात कही है, जिसने एक बार फिर उनके टेस्ट क्रिकेट करियर पर चर्चा तेज कर दी है। किशन ने कहा कि उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट बेहद पसंद है, लेकिन जब वह यह बात कहते हैं तो लोगों को उन पर भरोसा नहीं होता।ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ग्राउंड-2 पर नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ अपनी टीम को बड़ी जीत दिलाई। ईस्ट जोन ने यह मुकाबला एक पारी और 210 रन से अपने नाम किया। हालांकि इस मैच में किशन का बल्ला ज्यादा नहीं चला और वह सिर्फ चार रन बनाकर आउट हो गए, लेकिन मैच के बाद रेड-बॉल क्रिकेट को लेकर उनका बयान चर्चा में आ गया।
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किशन ने कहा कि उन्हें टेस्ट और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट की चुनौती पसंद है। उन्होंने कहा कि जब वह यह कहते हैं कि उन्हें रेड-बॉल क्रिकेट पसंद है तो लोग शायद उनकी बात पर विश्वास नहीं करते, लेकिन यह पूरी तरह सच है। उनके मुताबिक टेस्ट क्रिकेट में मिलने वाली चुनौती व्हाइट-बॉल क्रिकेट से बिल्कुल अलग होती है।किशन ने बताया कि फ्लैट ट्रैक पर बल्लेबाजी करना आसान होता है और उसमें भी काफी मजा आता है, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज को जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, वह खेल को अलग स्तर पर ले जाता है। गेंद की मूवमेंट, परिस्थितियां और लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखना रेड-बॉल क्रिकेट को मुश्किल लेकिन रोमांचक बनाता है।भारत के लिए ईशान किशन अब तक 32 वनडे और 55 टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं। उनके नाम 134 आईपीएल मैच भी हैं। टेस्ट क्रिकेट में उन्हें अब तक सिर्फ दो मैच खेलने का मौका मिला है। उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट जुलाई 2023 में खेला था। इसके बाद से भारतीय टेस्ट टीम में उनकी वापसी नहीं हो सकी है। इसके बावजूद किशन का कहना है कि रेड-बॉल क्रिकेट के लिए उनका प्यार कम नहीं हुआ है।
नॉर्थ ईस्ट जोन के खिलाफ मुकाबला किशन के करियर का 65वां फर्स्ट-क्लास मैच था। इससे पहले उन्होंने नवंबर 2025 में बड़ौदा के खिलाफ रणजी ट्रॉफी मुकाबला खेला था। यानी करीब नौ महीने के अंतराल के बाद वह फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में लौटे। इस दौरान उन्होंने आईपीएल, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और घरेलू क्रिकेट को मिलाकर 59 मुकाबले खेले।किशन ने माना कि लगातार व्हाइट-बॉल क्रिकेट खेलने के बाद रेड-बॉल क्रिकेट में लौटना आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के लिए व्हाइट-बॉल से रेड-बॉल और फिर रेड-बॉल से व्हाइट-बॉल क्रिकेट में बदलाव चुनौतीपूर्ण होता है। दोनों फॉर्मेट में खेलने का तरीका और मानसिकता अलग होती है। हालांकि, किशन के मुताबिक यही क्रिकेट की खूबसूरती भी है।उन्होंने खिलाड़ियों को यह संदेश भी दिया कि अगर किसी को बड़ा मुकाम हासिल करना है और अपनी अलग पहचान बनानी है तो उसे बहाने बनाने से बचना होगा। किशन ने कहा कि खिलाड़ियों को उन चीजों के बारे में शिकायत करने के बजाय खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए, जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है।दलीप ट्रॉफी के इस मुकाबले में किशन खुद बड़ी पारी नहीं खेल सके। वह चार रन के स्कोर पर विकेट के पीछे कैच आउट हुए। उन्होंने एक वाइड गेंद को पॉइंट के पीछे खेलने की कोशिश की थी, लेकिन उनका शॉट सही तरीके से नहीं लगा। किशन ने खुद माना कि उन्हें उस शॉट को खेलने के तुरंत बाद पछतावा हुआ।
किशन ने बताया कि शॉट खेलते समय ही उन्हें लगा कि वह क्या करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें पता था कि यह फर्स्ट-क्लास मैच है और ऐसी गेंदों को छोड़ना चाहिए। उनके मुताबिक लंबे समय तक रेड-बॉल क्रिकेट की प्रैक्टिस नहीं होने के कारण इस तरह की गलती हो सकती है।ईशान किशन का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय क्रिकेट में उनकी टेस्ट वापसी को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में उनके पास अनुभव भी है और आक्रामक बल्लेबाजी की क्षमता भी। हालांकि टेस्ट टीम में जगह बनाने के लिए उन्हें घरेलू रेड-बॉल क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करना होगा।दलीप ट्रॉफी उनके लिए इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच है। कप्तानी के साथ-साथ रेड-बॉल क्रिकेट में खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे किशन के लिए आगे के घरेलू मुकाबले काफी अहम होंगे। फिलहाल उनका बयान यह साफ करता है कि व्हाइट-बॉल क्रिकेट में सफलता के बावजूद वह टेस्ट और फर्स्ट-क्लास क्रिकेट को लेकर गंभीर हैं और रेड-बॉल क्रिकेट में वापसी की चुनौती से पीछे नहीं हटना चाहते।