इस प्रदर्शन का मकसद SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति और सवाल दर्ज कराना है। प्रदर्शन के जरिए लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की अपील की जा रही है। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची, वोटर अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। इसी कड़ी में CJP ने बेंगलुरु में एक अलग तरह के विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिसे ‘चप्पल प्रोटेस्ट’ नाम दिया गया है।
बेंगलुरु। दरअसल, चुनाव आयोग की Special Intensive Revision यानी SIR प्रक्रिया को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची, वोटर अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहे हैं। इसी कड़ी में CJP ने बेंगलुरु में एक अलग तरह के विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है, जिसे ‘चप्पल प्रोटेस्ट’ नाम दिया गया है।
आयोजकों के मुताबिक, इस प्रदर्शन का मकसद SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्ति और सवाल दर्ज कराना है। प्रदर्शन के जरिए लोगों से लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की अपील की जा रही है। इस प्रदर्शन को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसलिए है क्योंकि दक्षिण भारतीय सिनेमा के चर्चित अभिनेता प्रकाश राज के भी इसमें शामिल होने की बात कही जा रही है। प्रकाश राज इससे पहले भी सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखते रहे हैं। ऐसे में उनके प्रदर्शन में शामिल होने की खबर ने इस कार्यक्रम को और चर्चा में ला दिया है। नाम सुनकर सवाल उठता है कि आखिर चप्पल को विरोध का प्रतीक क्यों बनाया गया?
आयोजकों का कहना है कि यह प्रदर्शन प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर किया जा रहा है। यानी चप्पल के जरिए अपनी नाराजगी और विरोध को एक अलग तरीके से सामने रखने की कोशिश है। यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के संदेश के साथ आयोजित किए जाने की बात कही गई है।
आइए समझते है क्या है SIR विवाद?
Special Intensive Revision यानी SIR के तहत चुनावी मतदाता सूची की गहन समीक्षा की जाती है। चुनाव आयोग का कहना है कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को सुनिश्चित करना है। वहीं, विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों की ओर से प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि दस्तावेजों और सत्यापन की प्रक्रिया के कारण वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
यानी इस पूरे विवाद के केंद्र में है—वोटर लिस्ट और वोट देने का अधिकार।