Health Tips: हिन्दुस्तान में घरों में आज भी माता-पिता अपने बच्चों से पीरियड्स के बारे में बात करने में असहजता महसूस करते हैं। हांलाकि पीरियड्स एक ऐसी जैविक प्रक्रिया है जिसके बारे में बात न भी की जाय तो भी इसके बारे में जानने से रोका नहीं जा सकता। खासकर यदि बेटी का पहला पीरियड होने से पहले पेरेंट्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि इस प्रक्रिया को लेकर उसे जागरूक करने के साथ—साथ पीरियड्स से जुड़ी समाजिक चुनौतियों और अंधविश्वासों के बारे में भी बताया जाय।
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कैसे बताएं बेटी को पहले पीरियड के बारे में?
पीरियड को लेकर टीनेज बेटी से बात करना थोड़ा अजीब लग सकता है लेकिन शुरुआती जानकारी बढ़ती हुई बेटियों के लिए बेहद जरूरी होता है। इससे भी ज्यादा जरूरी होता है कि उन्हें यह जानकारी किसी विश्वसनीय स्त्रोत से मिले। तो आइए जानते हैं कि आखिर कैसे आप अपनी बेटी से उसके पहले पीरियड को लेकर बात कर सकते हैं?
1. बातचीत सवाल से करें
सबसे पहले अपनी बेटी से बात करते वक्त सवाल पूछें कि क्या वह पहले से पीरियड के बारे में जानती है या नहीं? क्योंकि हो सकता है कि उसे स्कूल या किसी दोस्त से इसके बारे में जानकारी मिली हो। जब उसकी बात सुनने के बाद यदि आपको लगे कि बेटी को इसके बारे में अधूरी जागरूकता है या जानकारी है तो उसे सही जानकारी दें।
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2. फैक्ट पर टिके रहें
पीरियड के बारे में बताने या शुरू करने के लिए फैक्ट पर टिके रहना बेहद जरूरी है। इस जैविक प्रक्रिया को साइंस क्लास की तरह ही बताने की कोशिश करें। जिसमें आप बता सकते हैं कि पीरियड महिला के शरीर को बच्चे के जन्म के लिए तैयार करने से जुड़ी हुई एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। उससे महिला के गर्भाशय का जिक्र करते हुए बताए कि उसमें हर महीने हॉर्मोन रिलीज होते हैं जिससे गर्भाशय के आसपास परत बन जाती है। जब गर्भाशय में कोई अंडा नहीं होता तो यह परत खून के रूप में वजाइना यानी योनी से बाहर निकलती है।
3. पीरियड के नैचुरल होने पर जोर दें
इस बात पर जोर देते हुए बेटी को बताए कि पीरियड एक नैचुरल प्रोसेस है जिससे हर लड़की को प्यूबर्टी यानी यौवनारंभ के दौरान गुजरना पड़ता है। यह कोई बीमारी नहीं होती है। इसके साथ ही ये भी बताए कि यदि लंबे समय तक पीरियड अनियमित रहता है तो यह किसी शारीरिक समस्या का संकेत होता है।
4. अपने अनुभव शेयर करें
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इसमें मां भी अपने पहले पीरियड का अनुभव अपनी बेटी से शेयर साझा करते हुए इस बायोलॉजिकल प्रोसेस को लेकर सहज कर सकती हैं। इसके साथ ही पीरियड से जुड़ी अपनी सारी चुनौतियों की खुलकर जानकारी दें सकती हैं।
5. हॉर्मोनल बदलाव के बारे में बाताएं
इस दौरान यह भी बताएं कि पीरियड के वक्त या उससे पहले शरीर में कुछ हॉर्मोनल बदलाव होते हैं जिसमें ब्रेस्ट का टाइट होना, उसमें हल्का दर्द, कमर या जांघों में दर्द, मूड स्विंग्स, पेट में दर्द और ऐंठन जैसे लक्षण का अनुभव होता है या दिखाई देता है।
6. हाइजीन टिप्स
इसके अलावा अपनी बेटी को सैनिटरी पैड के इस्तेमाल और उसे कितने घंटे के बाद बदलना है, इसकी भी जानकारी दें। साथ ही शरीर की स्वच्छता और स्कूल या बाहर होने पर कैसे खुद को संभालना है, यह भी बताएं।
7. पीरियड साइकल चार्ट मेंटेन करने की जानकारी
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बेटी को इसकी भी जानकारी दें कि पीरियड साइकिल चार्ट को मेंटेन करने से शरीर की हॉर्मोनल हेल्थ के बारे में पता चलता है। उसे बताए कि पीरियड साइकिल औसतन 28 दिन होता है जबकि सामान्य अवधि 21 से 35 दिन तक की होती है। क्योंकि आपकी बेटी को इसके बारे में जानकारी होना भी बेहद जरूरी है।