लखनऊ। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने एक बार फिर केंद्र सरकार से मांग की है कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले प्रावधान को 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Elections) में तुरंत लागू करने की घोषणा की जाए। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party प्रमुख ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) को चुनौती देते हुए कहा कि या तो वह 2027 तक इसे लागू करने की स्पष्ट समय सीमा बताए या फिर खुले तौर पर स्वीकार करे कि वह महिलाओं के हितों के खिलाफ है।
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पीडीए की माँग है कि जो ‘महिला आरक्षण’ समस्त विपक्ष ने मिलकर संसद में सहर्ष पास किया है उसे 2027 के उप्र विधानसभा चुनाव में लागू करने की घोषणा भाजपा सरकार तत्काल करे या कह दे कि पुरुषवादी भाजपाई और उनके सामंती संगी-साथी महिलाओं को आरक्षण के ख़िलाफ़ हैं।
जब तक ये घोषणा नहीं होगी… pic.twitter.com/uqC2zTingC
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 5, 2026
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यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनकी पार्टी का पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक (PDA) गठजोड़ महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में है और इसे जल्द लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार इस मुद्दे पर चुप रहती है, तो समाजवादी पार्टी इसे एक बड़े जन आंदोलन में बदल देगी और हर सप्ताह अलग-अलग स्थानों पर इसे उठाएगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें मोदी ने पहले समाजवादी पार्टी पर संसद में महिला आरक्षण (Women Reservation) का विरोध करने का आरोप लगाया था। यह मांग ऐसे समय आई है जब हाल ही में संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका।
लोकसभा में इसे दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला। 298 सांसदों ने समर्थन किया, जबकि 230 ने विरोध किया, जबकि पारित होने के लिए 352 वोट जरूरी थे। विश्लेषकों का मानना है कि समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) 2027 चुनाव से पहले महिलाओं और पीडीए वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
प. बंगाल में जब परिणाम मनमर्ज़ी से निकाला गया है तो भाजपाई परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री भी मनमर्ज़ी से ही बनेगा। इसीलिए ये विशेष माँग है कि इस बार ‘पर्ची’ उनके नाम की निकलनी चाहिए जो पौराणिक काल से नारी के प्रति पुरुषवादी नकारात्मक सोच और शोषण की प्रतीक-भूमिका निभा चुकी हैं।… pic.twitter.com/zvejFaoRBZ
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 5, 2026
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अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने लिखा कि पश्चिम बंगाल में जब परिणाम मनमर्ज़ी से निकाला गया है तो भाजपाई परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री भी मनमर्ज़ी से ही बनेगा। इसीलिए ये विशेष मांग है कि इस बार ‘पर्ची’ उनके नाम की निकलनी चाहिए जो पौराणिक काल से नारी के प्रति पुरुषवादी नकारात्मक सोच और शोषण की प्रतीक-भूमिका निभा चुकी हैं। जिन्हें भारतीय नारी का आदर्श मानने की सलाह लोहिया जी तक ने दी थी। आशा है ‘महिला आरक्षण’ के संदर्भ में इस पर अमल होगा।