नई दिल्ली। आज के दौर में एयर कंडीशनर (AC), भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए हमारी सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। घर हो या दफ्तर, आजकल लोग एसी (AC) की ठंडी हवा में घंटों समय बिता रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एसी का अत्यधिक उपयोग हमारे शरीर के लिए ‘धीमा जहर’ का काम करता है।
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हेल्थ विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा देर तक वातानुकूलित वातावरण में रहने से बहुत सारी समस्याएं हो सकती हैं। एसी हवा से पानी सोख लेता है, जिसके चलते अनजाने में हमारा शरीर नमी खोने लगता है जिससे डिहाईड्रेसन की भी संभावना हो सकती है। ऐसे में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं पीने से सिरदर्द, थकान और सुस्ती भी महसूस हो सकती है। इसके अलावा ठंडी हवा के वजह से जोड़ों और मांसपेशियों में अकड़न पैदा हो जाती है। जिसके चलते जोड़ों का दर्द, पीठ दर्द और सर्वाइकल पेन की परेशानी बढ़ सकती है।
एयर कंडीशनर (AC) की सुस्क हवा हमारे नाक और गले के म्यूकस मेंमब्रेन को सुखा देती है जिसके चलते खांसी, नाक बंद होना और साइनस का खतरा भी बढ़ जाता है। साथ ही गंदे फिल्टर की वजह से बैक्टीरिया और फफूंद हवा में मिलकर अस्थमा के मरीजों की हालत बिगाड़ सकते हैं। एसी (AC) वातावरण की आद्रता को 30 प्रतिशत तक कम कर सकता है जिसके चलते त्वचा और आंखों में सूखापन (Dryness) हो जाती है साथ ही त्वचा रूखी होकर फटने लगती है। इसके अलावा सामान्य तौर पर आंखों में जलन और ड्राई आई सिंंड्रोम की शिकायत हो जाती है।
अत्यधिक ठंडा तापमान शरीर की मेटाबॉलिज्म दर को बहुत धीमा भी कर सकता है, जिससे वजन बढ़ने (Obesity) की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा बाहर की भीषण गर्मी से आने के बाद अचानक ठंडे कमरे में प्रवेश करना टेंपरेचर शॉक का कारण भी बन सकता है जो शरीर के डिफेंस सिस्टम को प्रभावित करता है जिसके चलते बुखार और सर्दी—जुखाम भी हो सकता है।
क्या है सिक बिल्डिंग सिंड्रोम ?
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन दफ्तरों में ठीक वेंटिलेशन नहीं होता है, वहां पर लंबे समय तक एसी में काम करने वालों कर्मचारियों को सिरदर्द, चक्कर और एकाग्रता में कमी का अनुभव होता है। इसी लक्षण को ‘सिक बिल्डिंग सिंड्रोम’ कहा जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने सलाह दिया है कि एसी का तापमान हमेशा 24°C से 26°C के बीच रखें तथा एसी (AC) के फिल्टर को नियमित रूप से साफ करते रहे ताकि हानिकारक बैक्टीरिया जन्म ना ले सके। इसके अलावा प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पानी पीते रहें और समय-समय पर एसी बंद करके खिड़कियां खोलते रहे ताकि ताजी और स्वच्छ हवा का संचार हो सके।
रिपोर्ट: सुशील कुमार साह