नई दिल्ली। राजनीति के युग का अंत हो गया। आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का बुधवार को 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अब यह अहम चेहरा राजनिति में सिर्फ इतिहास बन कर रहा गया है। राव का जीवन कार्फी उतार- चढ़ाव से भरा था। वह आंध्र पदेश के मुख्यमंत्री उस वक्त बने थे, जब राज्य राजनीति तेजी से बदल रही थी। उन्होने टीडीपी के संस्थापक एटी रमा राव के खिलाफ भी बगावत कर दी थी और इसी बगावत के बाद ही वह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे।
पढ़ें :- Cyclone Arnab : बड़े विनाश के साथ मॉनसून की हो सकती है वापसी, साल का पहला चक्रवाती तूफान अर्नब 3 राज्यों में मचा सकता है भारी तबाही
पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव ने सन 1984 में एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाया था और तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक एटी रमा राव के खिलाफ बगावत कर दी थी। यह बगावत इतनी बड़ी थी उन्होने मुख्यमंत्री के पद पर कब्जा कर लिया था, लेकिन वह अपनी सरकार ज्यादस दिन तक नहीं चला पाए और उनकी सरकार कुछ ही हफ्तों में गिर गई और उन्हे मुख्यमंत्री के पद से इस्तिफा देना पड़ा। यह घटना आंध्र प्रदेश की राजनीति कि सबसे बड़ी राजनीतिक घटना थी। पूर्व सीएम राव का कार्यकाल भले ही बहुत छोटा रहा हो, लेकिन इसका असर लंबे समय का महसूस किया गया था। राव को अपनी सरकार के दौरान रानीतिक दलों और जनता दोनों की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इस दौरान केंद्र सरकार की भी भूमिका को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए थे। राव लम्बे समय का कांग्रेस में थे और कांग्रेस से उनका गहरा लगाव भी था। पार्टी ने कई अहम जिम्मेदारियां सौपी थी, जिससे उन्होने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
राजनीतिक जगत में फैली शौक की लहर
नादेंडला भास्कर राव के निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक जगह में शौक की लहर फैल गई है। देश भर के नेता उन्हे श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। बता दे की उनके विरोधी भी इस बात को मानते हैं कि भास्कर राव ने आंध्र प्रदेश की राजनीति को एक अलग दिशा दी थी। उनके फैसलों को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जा सका। एक तरफ वह अपने द्धारा लिए गए फैसलों के कारण हमेशा आलोचना का सामना करना पड़ता था।