‘Analog cheese’: भारतीय थाली की शान पनीर मानी जाती है। पनीर से कई तरह के स्नैक्स बनाए जाते है और हर आयु वर्ग के लोगों के द्वारा बड़े चाव से खाया जाता है। पौष्टिकता और स्वास्थ्य के लिहाज इसे बहुत पोषणीय माना जाता है। अधिकतर लोग मार्केट में मौजूद असली और नकली पनीर के बारे में ही जानते हैं। पनीर की शुद्धता को लेकर अक्सर चर्चाएं सुनने को मिलती है। इसी तरह पनीर के नाम से एक एनालॉग पनीर मिलती है। खासबात ये है कि ये पनीर न तो असली है और न ही नकली, ये है । जानिए आपकी सेहत के लिए किया सेफ है।
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एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर को असली पनीर की फर्स्ट कॉपी कहना गदलत नहीं होगा। ये टेस्ट में भी काफी हद तक असली पनीर जैसा ही होता है। लेकिन इसे वेजिटेबल ऑयल, समते दूसरे फैट्स, सोया आदि से मिलाकर बनाया जाता है। इसमें कोई भी डेयरी प्रोडक्ट (Dairy product) इस्तेमाल नहीं होता है। आजकल ज्यादातर जगहों पर इस सस्ते पनीर को पनीर की डिशेज में इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उपयोग कुछ खाद्य उद्योगों, रेस्तरां और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों (Processed food products) में लागत कम करने और एक जैसी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
यदि इसे निर्धारित खाद्य मानकों के अनुसार बनाया और सही तरीके से लेबल किया गया है, तो इसे अवैध या नकली नहीं कहा जा सकता। समस्या तब होती है जब इसे असली पनीर बताकर बेचा जाए।
असली और एनालॉग पनीर में अंतर
असली और एनालॉग पनीर में क्या अंतर है? असली पनीर मुख्य रूप से दूध से बनता है और इसमें प्राकृतिक दूध प्रोटीन तथा कैल्शियम अधिक होता है। एनालॉग पनीर में पोषण प्रोफाइल (Nutritional Profile) अलग हो सकती है, क्योंकि इसकी सामग्री निर्माता के अनुसार बदलती रहती है।