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Vedanta’s Green Dhamaka: अनिल अग्रवाल की कंपनी ने पांच साल में घटाया 25 लाख टन कार्बन उत्सर्जन

By Sushil Sah 
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नई दिल्ली। पिछले पांच वर्षों में विभिन्न स्थिरता पहलों के माध्यम से अनिल अग्रवाल के वेदांता ग्रुप के लौह अयस्क खनन और इस्पात कारोबार ने लगभग 25 लाख टन कार्बन उत्सर्जन को कम किया है। गुरूवार को इस कंपनी ने कहा कि इकोलॉजिकल रीस्टोरेशन, नवीकरणीय ऊर्जा अपनाने और स्वच्छ औद्योगिक प्रक्रियाओं जैसे कदम उसके भारी उद्योग के डीकार्बोनाइजेशन और राष्ट्रीय व वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप कोशिशों का भाग हैं।

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28,900 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम

विश्व पर्यावरण दिवस पर वेदांता आयरन एंड स्टील लिमिटेड ने कम-कार्बन भविष्य के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पुराने समय से चले आ रहे खनन व धातु कंपनी भी टिकाऊ प्रथाओं में आगे आ सकती है। स्वच्छ प्रौद्योगिकी का उपयोग कंपनी के कार्बन उत्सर्जन में कमी के प्रयासों में प्रमुख है। विद्युत चालित यात्री वाहन, पहिया लोडर व फोर्कलिफ्ट के इस्तेमाल से प्रत्येक वर्ष करीब 800 किलोलीटर डीजल की बचत हो रही है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भारी कमी आई है। सतत परिवहन व्यवस्था के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के जलमार्ग पोत संचालन से लगभग 2.1 लाख ट्रक यात्राओं के बराबर परिवहन कम हुआ। जिसके चलते 1.08 करोड़ लीटर डीजल की बचत हुई और करीब 28,900 टन ग्रीनहाउस गैस का उत्सर्जन कम हुआ।

2.4 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव

गोवा के अमोना स्थित पिग आयरन संयंत्र और बोकारो इस्पात संयंत्र में वेदांता ने अपशिष्ट ऊष्मा दुबारा प्रा्प्ती के जरिये कुल 100 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता को विकसित किया, जिससे 2.4 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचाव हुआ। पर्यावरण संरक्षण के तहत गोवा की संक्वेलिम पुनर्वास खदान जो कि 100 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है, में 7.5 लाख पेड़ लगाए गए हैं। जिसकी मदद से हर साल 16,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित किया जाता है। ​तीस सालों में यह क्षेत्र लगभग 4.8 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित कर चुका है। इसके अलावा, अमोना और बोकारो में घने वन (मियावाकी पद्धति) विकसित किए गए हैं, जहां 75,000 से भी अधिक पेड़ लगाए गए हैं।

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तीन लाख पेड़ लगाए गए

इसके अलावा नियमित वनीकरण अभियानों के तहत तीन लाख पेड़ और लगाए गए हैं। सालाना लगभग 1,500 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी लाने के लिए, बोकारो स्थित 15 लाख टन क्षमता वाले एकीकृत इस्पात संयंत्र में कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के साथ साझेदारी में द्रवित पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के स्थान पर पाइप द्वारा आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस की ओर बढ़ रही है। कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी पंकज कुमार शर्मा के अनुसार, टिकाऊ भविष्य के लिए उद्योगों को ऊर्जा उपयोग, परिवहन व्यवस्था और पर्यावरण के साथ अपने संबंधों पर पुन: विचार करना होगा।

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