Arun Yashwant Kulkarni ‘Nana’ : जिंदगी की राह में जब मुश्किल को अपनी ताकत बनाने का हुनर आ जाय तब इतिहास रचने से कोई नहीं रोक सकता है। इसको साबित किया महाराष्ट्र के अकोला के 76 वर्षीय अरुण यशवंत कुलकर्णी उर्फ ‘नाना’ ने। आज नाना सबके प्रेरणा स्रोत हैं, खासकर उन लोगों के लिए जिनकी जिंदगी पथरीली राहों पर रुक रुक कर चल रही है।
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यशवंत कुलकर्णी उर्फ ‘नाना’ को जब कैंसर की बीमारी ने तोड़ दिया था तब उन्होंने कैंसर को हराने का फैसला ले लिया और सफल रहे। पूरी दुनिया को दिखा दिया कि कैंसर को जीता जा सकता है। इसी तरह उन्होंने दुनिया को तब चौंका दिया जब दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण कराया और फिर भी नहीं रुके। बल्कि 3800 किलोमीटर की नर्मदा परिक्रमा पूरी कर इतिहास रच दिया।
‘नाना’ के हंसते हुए चेहरे से निकलती ऊर्जा युवाओं को प्रेरित करती है। सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन में लगातार सक्रिय वाले नाना ने हाल में ही 3800 किलोमीटर की दूसरी नर्मदा परिक्रमा पूरी कर एक नई मिसाल कायम की है।ये सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास की जीत है।