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राम मंदिर दान चोरी मामले में नया खुलासा, आरोपियों के पास मिली फर्जी रसीद बुक, ट्रस्ट की बैठक में भी उठे कई सवाल

By Harsh Gautam 
Updated Date

राम मंदिर दान चोरी विवाद: अयोध्या के राम मंदिर में दान से जुड़ी कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान एक और अहम जानकारी सामने आई है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नाम से तैयार की गई पुरानी फर्जी रसीद बुक बरामद हुई है। बताया जा रहा है कि शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे केवल दान की रकम में हेराफेरी ही नहीं करते थे, बल्कि श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाने के लिए नकली रसीदें भी देते थे। इन रसीदों पर ट्रस्ट का लोगो भी छपा हुआ था, जिससे पहली नजर में वे असली जैसी दिखाई देती थीं।

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सूत्रों के अनुसार, टिन्नू यादव, लव कुश, करुणेश, अनुकल्प समेत अन्य आरोपी जब किसी श्रद्धालु से दान लेते थे तो बदले में यही फर्जी रसीद थमा देते थे। इससे लोगों को लगता था कि उनका पैसा सीधे ट्रस्ट के खाते में दर्ज हो गया है। हालांकि बाद में मंदिर में कागजी रसीद की व्यवस्था बंद कर दी गई और पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई। इसके बाद श्रद्धालुओं को दान की रसीद डिजिटल माध्यम से मिलने लगी या फिर मंदिर के अधिकृत काउंटर से पर्ची जारी की जाने लगी। इसी वजह से आरोपियों ने पुरानी रसीदों का इस्तेमाल बंद कर दिया था।

इस मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी चंपत राय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कथित चोरी की जानकारी काफी पहले मिल गई थी और कुछ रकम भी बरामद कर ली गई थी, लेकिन उस समय पुलिस में मामला दर्ज नहीं कराया गया। सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि यदि शुरुआती स्तर पर ही एफआईआर दर्ज कर दी जाती तो मामला इतना नहीं बढ़ता और समय रहते कानूनी कार्रवाई हो सकती थी। बैठक में यह भी पूछा गया कि चढ़ावे की सुरक्षा और उससे जुड़ी व्यवस्था की जिम्मेदारी किसके पास थी और कथित बरामदगी के बावजूद पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई। फिलहाल मामले की जांच जारी है। आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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