Bael Sherbet : गर्मियों के मौसम में शरीर के तापमान को ठंड़ा रखने के लिए बेल का शरबत सदियों से लोग पीते आ रहे है। आर्युवेद में बेल का विशेष महत्व बताया गया है। आयुर्वेद में बेल (Aegle marmelos) को इसके अतुलनीय औषधीय गुणों के कारण ‘अमृत फल’ के समान माना गया है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके फल, पत्ते, जड़ और छाल सभी में स्वास्थ्यवर्धक गुण छिपे हैं।बेल के विभिन्न अंगों का उपयोग शरीर के तीनों दोषों (वात, पित्त और कफ) को संतुलित करने के लिए किया जाता है।
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आयुर्वेद के अनुसार इसके मुख्य औषधीय महत्व इस प्रकार हैं
पाचन तंत्र के लिए रामबाण
दस्त और पेचिश
कच्चे बेल का फल ग्राही (मल को बांधने वाला) होता है, जो अतिसार (डायरिया) और पेचिश के इलाज में बहुत प्रभावी है।
पका हुआ बेल
पका हुआ बेल का फल प्राकृतिक रेचक (laxative) के रूप में कार्य करता है, जो पुरानी कब्ज को दूर करने में सहायक है।
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जलन शांत होती है
गर्मियों में इसका शरबत पीने से शरीर का ताप संतुलित रहता है और पेट की जलन शांत होती है।
डायबिटीज
आजकल मधुमेह और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं भी काफी आम हो गई हैं। ऐसे में बेल का सेवन धीरे-धीरे शरीर के शुगर लेवल को संतुलित करने में सहायक हो सकता है। यह मेटाबॉलिक एक्टिविटी को बेहतर करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का सही उपयोग होता है और थकान कम महसूस होती है।