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Birthday Special: वक्त हालातों से लड़कर बदली किस्मत, जब पढ़ाई के लिए क्लीनर और चपरासी बनें, पढ़ें चंद्रमौली से रामानंद सागर बनने की कहानी

By प्रिन्सी साहू 
Updated Date

Birthday Special: 80 के दशक का वो समय जब एक टीवी सीरियल दूरदर्शन पर आते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था। लोग टीवी के सामने धूपबत्ती जलाकर हाथ जोड़ कर बैठ जाते थे। बीमारों को टीवी के सामने बैठा दिया जाता था शायद भगवान की नजर उन पर पड़े और शायद उसकी दिक्कतें दूर हो सकें। हम बात कर रहे हैं अस्सी के दशक के ऐसे ऐतिहासिक टीवी सीरियल की जिसे देखने के लिए लोग अपनी दुकानों को बंद कर देते थे तो महिलाएं घरों का काम जल्दी जल्दी  निपटा आदि कर टीवी के सामने बैठ जाते थे।

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ये किस्से आपने भी कभी न कभी किसी न किसी से जरुर सुना होगा। इस ऐतिहासिक टीवी सीरियल को बनाने वाले रामानंद सागर का आज जन्मदिन है। रामानंद सागर (Ramanand Sagar) का जन्म अविभाजित भारत के लाहौर जिले के असलगुरु ग्राम में 29 दिसंबर 1917 को हुआ था।  उन्हें अपने माता पिता का प्यार न मिल पाने की वजह से उनकी नानी ने उन्हें गोद ले लिया था।

ऐसे बने चंद्रमौली चोपड़ा से रामानंद (Ramanand Sagar)

बचपन में रामानंद सागर (Ramanand Sagar) का नाम चंद्रमौली चोपड़ा था। बाद में उनकी नानी ने उनका नाम बदलकर रामानंद रखा। 1947 में बंटवारे के बाद रामानंद सागर सबकुछ छोड़ अपने परिवार के साथ भारत आ गए। जब वे भारत आए थे तब उनकी जेब में मात्र पांच आने थे।

आगे चलकर उन्होंने अपनी मेहनत, काबिलियत और वक्त और हालातों से लड़कर इतिहास रचा। उन्होंने रामायण, श्री कृष्ण, जय गंगा मैया और जय महालक्ष्मी जैसे अनेको टीवी सीरियल बनाए। जो उन दिनों दूरदर्शन पर प्रसारित होते थे।

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जब पढ़ाई पूरी करने के लिए पार्ट टाइम करते थे क्लीनर और चपरासी की नौकरी

एक समय ऐसा भी था जब रामानंद सागर (Ramanand Sagar) के हालात अच्छे नहीं थे फिर भी उन्होंने अपने हालातों में संघर्ष किया और पढ़ाई पूरी करने के पैसे न होने की वजह से पार्ट टाईम ट्रक क्लीनर और चपरासी की नौकरी की। दिन में काम करते थे और रात में पढ़ाई।

आज शायद ही कोई हो जो उन्हें नहीं जानता हो। अस्स के दशक का ऐतिहासिक टीवी सीरियल आज भी लोगो के दिलों में बेहतरीन किस्सों कहानियों तरह बसा हुआ है। आज भी यह धारावाहिक किसी न किसी टीवी चैनल पर चलता नजर आ जाता है।

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