नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आंतरिक सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों के प्रबंधन को लेकर एक ऐतिहासिक और विवादास्पद कदम उठाया है। ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ (CAPF General Administration Bill 2026) को राज्यसभा की मंजूरी मिल गई है। यह बिल अब देश के पांच प्रमुख बलों BSF, CRPF, CISF, ITBP और SSB के प्रशासनिक संचालन का नया आधार बनेगा।
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IPS का दबदबा : नए कानून के तहत अब इन सभी पांचों बलों के महानिदेशक (DG) और विशेष महानिदेशक (SDG) के 100 फीसदी पद केवल IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित होंगे।
पदों का नया गणित: बिल के अनुसार, अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के कम से कम 67 फीसदी और महानिरीक्षक (IG) के 50 फीसदी पद भी IPS कैडर के पास रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असर: जानकारों का मानना है कि यह बिल 2025 के उस अदालती आदेश के प्रभाव को कम कर सकता है, जिसमें CAPF के खुद के कैडर अधिकारियों को शीर्ष पदों तक पहुंचने का अधिकार (OGAS दर्जा) दिया गया था।
एक देश, एक नियम: यह विधेयक विभिन्न बलों के पुराने अलग-अलग नियमों को हटाकर एक साझा ‘अम्ब्रेला एक्ट’ लागू करता है।
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सरकार का पक्ष: गृह मंत्रालय (MHA) ने सदन में तर्क दिया कि आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को देखते हुए पुलिसिंग और जांच का अनुभव रखने वाले IPS अधिकारियों का नेतृत्व अनिवार्य है। इससे राज्यों की पुलिस और केंद्रीय बलों के बीच बेहतर तालमेल बैठेगा।
विपक्ष, बोला-कैडर अधिकारियों के मनोबल पर चोट
विपक्ष और ‘ऑल इंडिया सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेस ऑफिसर्स एसोसिएशन’ ने इसे “कैडर अधिकारियों के मनोबल पर चोट” बताया है। उनका कहना है कि जो अधिकारी अपनी पूरी जिंदगी सीमा पर या नक्सल क्षेत्रों में बिताते हैं, उन्हें उनके ही बल के शीर्ष पद से वंचित करना अन्यायपूर्ण है।
रिपोर्ट: सुशील कुमार साह