Cuban Energy Crisis : अमेरिका-ईरान के बीच तनाव भरे माहौल के बीच क्यूबा में ऊर्जा संकट गहरा गया है। तेल संकट के बीच क्यूबा सरकार का कहना है कि यह संकट अमेरिका की ओर से लगाए गए तेल प्रतिबंधों की वजह से पैदा हुआ है। देश में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अस्पताल, स्कूल और सरकारी दफ्तर भी प्रभावित हुए हैं। सार्वजनिक परिवहन और पर्यटन उद्योग पर भी बड़ा असर पड़ा है। क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कनेल (President Miguel Díaz-Canel) ने अमेरिका पर “ऊर्जा नाकेबंदी” (“Energy Blockade”) का आरोप लगाया है।
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देश के ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि क्यूबा के पास अब डीजल और फ्यूल ऑयल पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिससे हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। राजधानी हवाना में कई इलाकों में 20 से 22 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। लोग सड़कों पर उतर आए हैं, जगह-जगह प्रदर्शन हुए और लोगों ने “बिजली चालू करो” जैसे नारे लगाए।
क्यूबा सरकार का कहना है कि यह संकट अमेरिका की ओर से लगाए गए तेल प्रतिबंधों की वजह से पैदा हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी 2026 में ऐसे देशों पर टैरिफ की धमकी दी थी, जो क्यूबा को ईंधन भेजते हैं। इसके बाद वेनेजुएला और मेक्सिको जैसे देशों ने तेल सप्लाई लगभग बंद कर दी।
वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता देने को तैयार है, लेकिन क्यूबा सरकार ने इसे ठुकरा दिया।