अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की मांग बढ़ती जा रही है। कुछ दिनों पहले जापान ने अल्फोन्सो, केसर और बंगानपाली जैसी प्रीमियम भारतीय आम के किस्मों को आयात के लिए अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था। लेकिन हाल ही के खबरों के मुताबिक, भारत के आम अब ब्रिटेन के लिए रवाना हो गए हैं।
नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय आमों की मांग बढ़ती जा रही है। हाल ही में ब्रिटेन ने दिल खोलकर भारतीय आमों का स्वागत किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, झारखंड के सिमडेगा जिले से 1.5 टन ताजा ‘आम्रपाली’ आम की पहली खेप सफलतापूर्वक ब्रिटेन के लिए भेज दी गई है।
महिला किसानों की बड़ी कामयाबी
यह निर्यात पूरी तरह से महिला संचालित पहल है। बानो प्रखंड की ‘बेउरा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ (Farmer Producer Company) से जुड़ी सिमडेगा जिले के स्थानीय महिला किसानों ने इस खेप को तैयार किया है। इन उच्च गुणवत्ता वाले आमों की बागवानी झारखंड सरकार की ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ के तहत की गई है। कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) इसमें सहयोग प्रदान किया है।
इस सौदे से स्थानीय महिला किसानों की आमदनी में काफी उछाल देखने को मिला है। स्थानीय बाजारों में जहां इन आमों की कीमत महज ₹25 प्रति किलोग्राम थी, वहीं इस निर्यात के माध्यम से किसानों को ₹42 से ₹50 प्रति किलोग्राम तक का मूल्य मिला है। जेजीबी एग्रोफ्रेश प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से इस प्रीमियम खेप को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से ब्रिटेन भेजा गया। ‘आम्रपाली’ आम को ‘दशहरी’ और ‘नीलम’ किस्मों के संकरण (Hybrid) से तैयार किया गया है, जो अपनी अत्यधिक मिठास, गहरे नारंगी गूदे और बेहतरीन सुगंध के लिए जाना जाता है। यह स्वाद और सेहत का बेजोड़ संगम है।
इसमें कैरोटीन (Vitamin A) की मात्रा दूसरे आमों की तुलना में काफी अधिक होती है। आम्रपाली आम, झारखंड के अलावा ओडिशा के ढेंकानाल जिले से भी इस सीजन में बड़े पैमाने पर ब्रिटेन और जर्मनी भेजे जा रहे हैं। यह सफल निर्यात भारतीय कृषि के ‘लोकल गोज़ ग्लोबल’ के संकल्प को मजबूत करने के साथ—साथ यह भी साबित करता है कि भारत के सुदूर ग्रामीण इलाकों की महिलाएं भी वैश्विक व्यापार के मंच पर अपनी आत्मनिर्भरता की कहानी लिख रही हैं।