Cuba’s oil shortage : क्यूबा में अमेरिकी ईंधन प्रतिबंध के बीच सड़के सूनी हो गई है। जहां एकतरफ क्यूबा पर कड़े आर्थिक और ईंधन प्रतिबंध लगे हुए है, वहीं दूसरी तरफ भीषण चक्रवाती तूफान ‘मेलिसा’ के पीड़ितों तक बैलगाड़ी से राशन और दवाइयां पहुंच रही है। वहीं ईंधन प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिका यहां के पीड़ितों के लिए राशन और दवाइयां भेज रहा है।
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यह विरोधाभास क्यूबा के ग्रामीण जनजीवन में साफ दिख रहा है। जहां लोग बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। कुदरत के कहर चक्रवात मेलिसा ने सैकड़ों लोगों के आशियाने उजाड़ दिए थे। इस दौर में भी अमेरिकी प्रतिबंधों की मार ऐसी है कि मदद का सामान बंदरगाहों और गोदामों से निकालकर गांवों तक ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है। जब पेट्रोल और डीजल पूरी तरह खत्म हो चुका है, तो वालंटियर्स हार मानने के बजाय बैलगाड़ियों पर अनाज और दवाइयों के बक्से लादकर निकल पड़े हैं। अमेरिकी पाबंदियों के बावजूद, वाशिंगटन इसी संगठन के जरिए क्यूबा के लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचा रहा है।
पीड़ितों की हो रही मेडिकल जांच
इस केयर पैकेज में सिर्फ खाने-पीने का सामान ही नहीं है, बल्कि तियोदार्दो जैसे सैकड़ों जरूरतमंदों को चावल, बीन्स, कुकिंग ऑयल, डिब्बाबंद खाना, नहाने और कपड़े धोने का साबुन, टूथब्रश और पानी साफ करने वाली क्लोरीन की गोलियां भी दी जा रही हैं। इसके साथ ही, इस अभियान के तहत पीड़ितों की मेडिकल जांच की जा रही है और उनके बाल भी काटे जा रहे हैं।
क्यूबा के लोगों के लिए इस समय राजनीति से ज्यादा पेट भरना और सिर छुपाने की जगह ढूंढना पहली प्राथमिकता बन चुका है।
हालांकि, क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल (President Miguel Díaz-Canel)का नजरिया इस मदद को लेकर थोड़ा अलग है। उनका तर्क है कि अमेरिका की ओर से दी जाने वाली इस तरह की टुकड़ों-टुकड़ों की सहायता से क्यूबा का भला नहीं होने वाला। उनका कहना है कि अगर अमेरिका वाकई क्यूबा के लोगों की तकलीफ कम करना चाहता है, तो उसे पिछले छह दशकों से अधिक समय से क्यूबा पर लगाए गए कड़े व्यापारिक प्रतिबंधों (strict trade restrictions) को पूरी तरह से हटा लेना चाहिए।
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