Gallstone problem: कई लोगो को पित्त की पथरी (gallstones) की दिक्कत से परेशान रहते हैं। पित्त की पथरी की वजह से बहुत अधिक दर्द होता है। इस दर्द को कोई समय नहीं होता है यह किसी भी समय होना शुरु हो जाता है। पित्ताशय की पथरी (gallstones) को ऑपरेशन के द्वारा ही निकाला जा सकता है।
पढ़ें :- यूपी में ब्राह्मण फिर निशाने पर, BHU की परीक्षा में पूछा गया विवादित सवाल, ब्राह्मणवादी पितृसत्ता ने महिलाओं के विकास में बाधा डाली?
जब गॉलब्लैडर में तरल पार्थ की मात्रा सूखने लगती है तो उसमें मौजूद चीनी नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएंट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे छोटे पत्थर के टुकड़ों जैसे आकार में बदल जाते है। जिन्हें गॉलस्टोन्स कहा जाता है। पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल बिलीरुबिन और पित्त लवणों का जमाव हो जाता है।
अस्सी प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रॉल की बनी होती है। धीरे धीरे वे कठोर हो जाती हैं तथा पित्ताशय के अंदर पत्थर का रुप ले लेती है। कोलेस्ट्ऱॉल स्टोन पीले हरे रंग के होते है। इसका एक और कारण पित्त का पर्याप्त रुप से खाली न होना भी हो सकता है। जिसके कारण गाढ़े पित्त का संग्रहण होने लगता है और पथरी बन सकती है।
अगर किसी को पित्त में पथरी (gallstones) की दिक्कत हो रही हो तो उसे पित्ताशय में सूजन और दाहिनी बगल में दर्द, बुखार, पीलिया, उल्टी होना, पसीना और पेट में दर्द की दिक्कत हो सकती है। इसके बचने के लिए सुबह खाली पेट नींबू पानी एक सप्ताह तक पीने से फायदा होता है। इसके अलावा तली भुनी चीजें, सिगरेट, शराब और चाय कॉफी से दूर रहें। हरी सब्जियों और फलों को अधिक खाएं।
पढ़ें :- UP News : अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर कसा तंज, बोले-रुपया गिरा, पेपर लीक हुआ, सरकार फिर भी ‘मजबूत’
,