होली के त्यौहार की बात हो और पापड़ गुझिया का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। होली के दिन सभी लोग एक दूसरे के घर जाकर रंग लगाते है और पापड़ गुझिया से मुंह मीठा करते है। पहले लोग घरों में पापड़ बनाते है जो सेहत पर बुरा असर नहीं डालते थे।
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आज के समय में मार्केट में तमाम तरह के रंग बिरंगे पापड़ आसानी से मिल जाते है लोग अपनी व्यस्ता और समय बचाने के लिए इन्हे खरीद लेते है। बाजार के रंग बिरंगे दिखने वाले ये पापड़ सेहत पर बुरा असर डालते है।पापड़ बनाते समय उस में प्रिजर्वेटिव का इस्तेमाल होता है।
इस प्रिजर्वेटिव में नमक और सोडियम सॉल्ट मिलाया जाता है। इससे पापड़ का स्वाद तो बढ़ जाता है लेकिन ये हमें सेहत से जुड़ी समस्याएं दे जाता है।पापड़ में इस्तेमाल किए गए प्रिजर्वेटिव से किडनी और हार्ट से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
पापड़ में दो रोटी के जितनी कैलोरी होती है। इसको खाने से मोटापा बढ़ता है इसलिए अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो पापड़ बिलकुल न खाएं।पापड़ में ज्यादा मसाला और आर्टिफिशियल फ्लेवर मिलाया जाता है जो एसिडिटी और गैस की समस्या को बढ़ावा देता है। अगर आप पापड़ खाते हैं तो इससे आपका पेट खराब हो सकता है।
वहीं अगर गुझिया की बात करें तो होली का त्यौहार गुझिया के बिना अधूरा होता है। गुझिया मैदा और खोया या मावा में ड्राई फ्रूट्स से बनाई जाती है। एक एक करके ये गुझिया कब अधिक हो जाती है पता नहीं चल पाता है। यह सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
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डाइटीशियन के अनुसार बहुत अधिक गुझिया खाने से सीने में जलन, ब्लोटिंग, अपच और गैस की समस्या हो सकती है। इसका अधिक सेवन करने से दस्त की समस्या का खतरा रहता है। गुझिया में चीनी हाई ब्लड शुगर,वजन बढ़ने और कई दिक्कतों हो सकती है। तेमें बनी गुझिया हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या हो सकती है।