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Golu Devta Temple : गोलू महाराज को “न्याय का देवता” माना जाता है, हजारों घंटियों और भक्तों की ‘अर्ज़ियों’ के लिए प्रसिद्ध

By अनूप कुमार 
Updated Date

Golu Devta Temple : उत्तराखंड के कुमाऊं और पूर्वी गढ़वाल क्षेत्र के सबसे श्रद्धेय लोक देवताओं में से एक गोलू महाराज ,जिन्हें गोलू देवता या गोलज्यू भी कहा जाता है। मान्यता है कि उन्हें “न्याय का देवता” माना जाता है, जिनके दरबार में लोग अपनी परेशानियाँ और कानूनी विवाद तक लेकर आते हैं। और अर्जी के रूप में गोलू देवता को चढ़ाते है। मान्यता पूरी होने के बाद गोलज्यू देवता को घंटियां चढ़ते है। गोलू महाराज को भगवान शिव का अवतार (गौर भैरव) माना जाता है। गोलू महाराज का सबसे प्रमुख मंदिर चितई गोलू देवता मंदिर (अल्मोड़ा) है, जो अपनी हजारों घंटियों और भक्तों द्वारा लिखी गई ‘अर्ज़ियों’ के लिए प्रसिद्ध है। अल्मोड़ा से पिथौरागड़ की ओर जाते हुए, कुछ किलोमीटर पश्चात, एक छोटा किन्तु अत्यंत महत्वपूर्ण मंदिर है।

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पौराणिक कथा: लोक कथाओं के अनुसार, वे कत्यूरी राजा झाल राय और रानी कलिंगा के पुत्र थे। जन्म के समय उनकी सौतेली माताओं ने ईर्ष्यावश उन्हें एक सिल-बट्टे (पत्थर) से बदल दिया था, लेकिन अंततः उन्होंने अपना असली परिचय सिद्ध किया और न्यायप्रिय शासक बने।
सवारी: उन्हें अक्सर सफेद घोड़े पर सवार एक योद्धा के रूप में चित्रित किया जाता है, जिनके हाथ में धनुष और बाण होता है।

 

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