Gujrat ATS: गुजरात में गुजरात आतंकवाद-रोधी दस्ता (ATS) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देश विरोधी गतिविधियों में शामिल दो युवकों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये दोनों आरोपी भारत में हमले करने, हथियार और फंड जुटाने और देश के खिलाफ जंग छेड़ने की साजिश रच रहे थे। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए तैयार किया जा रहा था।
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ATS की जांच, जिसकी अगुवाई डिप्टी एसपी वीरजीत सिंह परमार ने की, में सामने आया कि दोनों युवक पिछले करीब 7 महीनों से WhatsApp और Instagram पर सक्रिय थे। वे 12-13 लोगों के एक बेहद क्लोज ग्रुप का हिस्सा थे, जहां ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे कट्टरपंथी एजेंडे पर चर्चा होती थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह ग्रुप ISIS जैसे आतंकी संगठनों की विचारधारा से प्रभावित था और ईरान, पाकिस्तान व अफगानिस्तान से जुड़े कट्टरपंथी कंटेंट को फॉलो कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपी किसी विदेशी हैंडलर के संपर्क में नहीं थे, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए खुद ही “सेल्फ-रेडिकलाइज्ड” हो गए थे, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई चुनौती बनता जा रहा है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इरफान खान पठान और मु्र्शिद जाहिद अख्तर शेख के रूप मे हुई है। 22 वर्षीय इरफान सिद्धपुर का रहने वाला है। उसने मेहसाणा से MSc केमिस्ट्री की पढ़ाई की है और फिलहाल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। वहीं दूसरा आरोपी मु्र्शिद जाहिद 21 साल का है, जो मूल रूप से बिहार का निवासी है। उसने आठवीं तक पढ़ाई की है और मुंबई में अपने भाई के साथ बिरयानी की दुकान पर काम करता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों का कोई आपराधिक इतिहास सामने नहीं आया है, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है।
ATS को एक खास इनपुट मिलने के बाद कार्रवाई की गई। लोकल पुलिस की मदद से एक आरोपी को सिद्धपुर से और दूसरे को मुंबई से गिरफ्तार किया गया। फिलहाल दोनों के खिलाफ IPC की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है और एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल हो सकता है। यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का तेजी से कट्टरपंथ की ओर झुकाव सुरक्षा के लिहाज से कितना बड़ा खतरा बनता जा रहा है। बिना किसी सीधे संपर्क के, केवल ऑनलाइन कंटेंट के जरिए इस तरह का “सेल्फ-रेडिकलाइजेशन” देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई और गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है।