Hanuman Ji Shanidev Vardaan : सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह को बहुत ही पुनीत माना जाता है । ये पूरा माह हनुमान जी समर्पित माना जाता है। हनुमान जी चिरंजीवी हैं और अजर अमर हैं। शास्त्रों के अनुसार, त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम के मानव रूप में वैकुंठ प्रस्थान करने के बाद से ही वे निरंतर तपस्या में लीन हैं। पौराणिक कथाओं और ग्रंथों में हनुमान जी की तपस्या से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का वर्णन मिलता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जहां भी सच्चे मन से रामकथा या हनुमान जी का स्मरण होता है, वे वहां सूक्ष्म रूप में प्रकट हो जाते हैं।
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एक बार जब हनुमान जी प्रभु श्रीराम के ध्यान में गहरे लीन थे, तब शनिदेव उनकी तपस्या को भंग करने के उद्देश्य से वहां पहुंचे।शनिदेव ने हनुमान जी के ध्यान को भंग करने के उद्देश्य से उन पर अपनी वक्र दृष्टि डाली, लेकिन हनुमान जी पर इसका कोई असर नहीं हुआ।इससे क्रोधित होकर शनिदेव ने हनुमान जी को ललकारते हुए कहा, “हे वानर! आँखें खोलो। देखो तुम्हारे सामने कौन खड़ा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार तुम्हारी राशि पर मेरी साढ़ेसाती शुरू होने वाली है, मैं तुम्हारे शरीर में प्रवेश करने आया हूँ।”
शनिदेव ने हनुमान जी के शरीर पर प्रवेश करने का प्रयास किया। हनुमान जी ने अपनी साधना में विघ्न रोकने के लिए अपने शरीर का आकार बढ़ाना शुरू कर दिया और अपनी पूंछ में शनिदेव को लपेटकर पहाड़ों पर रगड़ना शुरू कर दिया।
शनिदेव का वचन और सरसों के तेल का रहस्यजब शनिदेव ने अपनी हार स्वीकार कर ली, तब हनुमान जी ने उन्हें अपनी पूंछ के बंधन से मुक्त किया। पीड़ा से तड़पते हुए शनिदेव के घावों को शांत करने के लिए हनुमान जी ने उनके पूरे शरीर पर सरसों का तेल लगाया, जिससे शनिदेव को दर्द से तुरंत राहत मिली।
कृतज्ञ होकर शनिदेव ने हनुमान जी को दो महत्वपूर्ण वचन दिए:
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पहला वचन: वे हनुमान जी के किसी भी सच्चे भक्त या श्रीराम के उपासक पर कभी अपनी कुदृष्टि नहीं डालेंगे और न ही उन्हें प्रताड़ित करेंगे।
दूसरा वचन: जो भी भक्त शनिवार के दिन शनिदेव को सरसों का तेल और तिल अर्पित करेगा, उसके जीवन के सभी शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट दूर हो जाएंगे