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टीएमसी के 20 सांसद हुए बागी ? काकोली घोष ने NDA को समर्थन देने के लिए ओम बिरला को भेजा पत्र

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर घिरा राजनीतिक संकट अब और गहराता जा रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में हार के बाद 58 विधायकों की बगावत अब टीएमसी (TMC) के संसदीय दल तक भी पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस में टूट की अटकलों पर सोमवार को पार्टी की लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार (Lok Sabha MP Kakoli Ghosh Dastidar) ने मुहर लगा दी है। सांसद काकोली घोष (Kakoli Ghosh) ने कहा है कि मेरे साथ टीएमसी के करीब 20 सांसदों ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है।

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यह एलान ऐसे समय में सामने आया है, जब टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी  (TMC Supremo Mamata Banerjee) दिल्ली में भाजपा के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी रणनीति तैयार करने के लिए इंडिया ब्लॉक की बैठक में भाग ले रही थीं।  काकोली घोष (Kakoli Ghosh)  ने कहा कि लगभग 20 टीएमसी सांसदों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के समर्थन के लिए लोकसभा अध्यक्ष को अपनी स्थिति से अवगत करा दिया है।

काकोली घोष बोलीं- एनडीए को देंगे समर्थन

टीएमसी (TMC) के वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद और 12 राज्यसभा सांसद हैं। यह दावा करते हुए कि वह लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हैं, दस्तीदार ने कहा कि यह फैसला साथी सांसदों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के भीतर बढ़ते आंतरिक संकट के बीच आया है, जिसने हाल के दिनों में वरिष्ठ नेताओं के खुले विरोध और इस्तीफों को देखा है।

सूत्रों के अनुसार, असंतुष्ट सांसद स्पीकर के समक्ष यह तर्क देने का इरादा रखते हैं कि दस्तीदार लोकसभा में पार्टी की वैध मुख्य सचेतक बनी हुई हैं और पार्टी नेतृत्व द्वारा बाद में की गई कोई भी घोषणा आवश्यक संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से पूरी नहीं की गई थी।

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भाजपा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन समर्थन देंगे टीएमसी सांसद

असंतुष्ट खेमे के सूत्रों के अनुसार, सांसदों ने तत्काल टीएमसी से इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे एनडीए का समर्थन करते हुए एक अलग संसदीय गुट के रूप में कार्य करने का इरादा रखते हैं। यह एक ऐसी रणनीति है जिसे दल-बदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है।

घोष दस्तीदार ने कहा कि समूह ने राजनीतिक रूप से एनडीए के साथ खुद को जोड़ने का फैसला किया है, यह तर्क देते हुए कि यह जनमत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि हमने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है और मानते हैं कि हमारे भविष्य के राजनीतिक मार्ग को एनडीए के हिसाब से होना चाहिए। टीएमसी (TMC) नेतृत्व ने अभी तक इन दावों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए क्यों बड़ा झटका?

इंडिया ब्लॉक की बैठक के लिए टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) रविवार को ही दिल्ली पहुंच गई थीं। दावा किया जा रहा था कि इस दौरान ममता बनर्जी पार्टी सांसदों के साथ बैठक कर सकती हैं। हालांकि, काकोली घोष दस्तीदार के दावे ने टीएमसी को बुरी तरह से हिला दिया है। पश्चिम बंगाल में पहले ही करीब 58 विधायकों ने पार्टी से अलग होकर ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। वहीं, अब दिल्ली में ममता बनर्जी की मौजदूगी के बीच टीएमसी सांसदों का एनडीए को समर्थन देने का एलान पार्टी पर दीदी की कमजोर होती पकड़ को दिखा रहा है।

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संसदीय दल में बगावत का यह गणितीय समीकरण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। टीएमसी के वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद हैं, जिनमें से एक सीट बशीरहाट के सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद खाली है। 20 सांसदों का समर्थन दल-बदल विरोधी कानून के तहत सुरक्षा के लिए आवश्यक दो-तिहाई सीमा को आराम से पार कर जाएगा। यह घटनाक्रम असंतुष्ट सांसदों द्वारा नई दिल्ली में एक बंद कमरे में बैठक करने के एक दिन बाद आया है और यह पार्टी नेतृत्व के निर्वाचित प्रतिनिधियों पर अधिकार पर सवाल उठा सकता है।

ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के लिए, यह संकट अब संगठनात्मक असंतोष से पार्टी की संसदीय दल के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण खोने की आशंका तक पहुंच गया है, जिसके टीएमसी और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गुट दोनों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

राज्यसभा में भी लगा दीदी को झटका

राज्यसभा सांसद और टीएमसी नेता सुखेंदु शेखर रॉय (Rajya Sabha MP and TMC leader Sukhendu Sekhar Roy) ने सोमवार को राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफा देने के साथ ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का एलान कर दिया। पूर्व टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय (Sukhendu Sekhar Roy) ने सोमवार को आरजी कर मामले को लेकर टीएमसी की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य नेतृत्व जमीनी हकीकतों से कट गया है।

ममता पर साधा निशाना

इस्तीफा देने के बाद रॉय ने कहा कि सत्ता उनके सिर पर इस हद तक चढ़ गई थी कि उन्हें लगता था कि दुनिया में कोई भी उन्हें छू नहीं सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पंद्रह वर्षों से सत्ता में काबिज मंत्री, पंचायत नेता, पार्षद और महापौर लोगों की पहुंच से बाहर हैं, जबकि जमीनी स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है।

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