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Health Special : सेरेब्रोवास्कुलर बीमारी के लक्षण, खतरे और बचाव, प्रतिवर्ष इस बीमारी से 6.5 मिलियन लोगों की होती है मौत

By santosh singh 
Updated Date

नई दिल्ली। आधुनिक जीवनशैली, असंतुलित खान-पान और मानसिक तनाव के कारण मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इन्हीं स्वास्थ्य समस्याओं में से एक प्रमुख समूह है। सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियां (Cerebrovascular Diseases)। ये बीमारियां तब होती हैं जब मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों (Blood Vessels) या नसों में रुकावट आती है या वे फट जाती हैं। समय पर पहचान न होने पर यह स्थिति स्थायी शारीरिक विकलांगता या जानलेवा साबित हो सकती है।

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क्या हैं सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियां?

‘सेरेब्रो’ का अर्थ है मस्तिष्क और ‘वास्कुलर’ का संबंध रक्त वाहिकाओं से है। जब मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचाने वाले रक्त का प्रवाह बाधित होता है, तो मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं। रिपोट के अनुसार इस बीमारी से सालाना लगभग 65 लाख (6.5 मिलियन) लोगों की मौतें अकेले स्ट्रोक और सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियों के कारण होती है।
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हेल्थ एक्सपर्ट मुख्य रूप से निम्नलिखित कारण बताते हैं।

इस्कीमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke) : रक्त का थक्का (Blood Clot) बनने या धमनी संकरी होने के कारण मस्तिष्क में खून का बहाव रुक जाना।

हेमोरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke) : उच्च रक्तचाप या कमज़ोरी के कारण मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाना और आंतरिक रक्तस्राव (Brain Hemorrhage) होना।

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ट्रांसिएंट इस्कीमिक अटैक (TIA / Mini Stroke) : मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति में कुछ समय के लिए रुकावट आना। यह आने वाले गंभीर स्ट्रोक की अग्रिम चेतावनी मानी जाती है।

एनेयुरिज्म (Aneurysm) : धमनियों की दीवार में गुब्बारे जैसी सूजन आना, जिसके फटने का जोखिम रहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये बीमारियां मुख्य रूप से खराब जीवनशैली और मेडिकल कंडीशंस से जुड़ी होती हैं। उच्च रक्तचाप (High BP) यह सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियों का सबसे बड़ा कारण है।

धूम्रपान और नशा : यह धमनियों को सख्त और संकरा बनाता है।

उच्च कोलेस्ट्रॉल व मधुमेह : रक्त वाहिकाओं में प्लाक (Fat) जमा होने से रुकावट पैदा होती है। मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता,गतिहीन दिनचर्या और अनियंत्रित वजन स्ट्रोक के जोखिम को दोगुना कर देते है।

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डॉक्टर के अनुसार मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुकने पर तुरंत इलाज की आवश्यकता होती है। इसके शुरुआती संकेतों को F.A.S.T. नियम से आसानी से समझा जा सकता है:

F (Face – चेहरा) : हंसने या बोलने पर चेहरे का एक तरफ ढलक जाना या सुन्न होना।

A (Arms – हाथ) : दोनों हाथ उठाने पर एक हाथ कमजोर महसूस होना या नीचे गिरना।

S (Speech – बोली) : बोलने में लड़खड़ाहट होना या बात समझने में कठिनाई आना।

T (Time – समय) : ऐसे लक्षण दिखते ही बिना देरी किए तुरंत निकटतम अस्पताल या इमरजेंसी मेडिकल सर्विस से संपर्क करें।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सही जीवनशैली अपनाकर सेरेब्रोवास्कुलर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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ब्लड प्रेशर व शुगर नियंत्रित रखें। नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराएं। संतुलित आहार- भोजन में फाइबर, फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं तथा नमक का सेवन लाईट करें। प्रातिदिन योगा करे, कम से कम 30 मिनट पैदल चलें या एरोबिक एक्सरसाइज करें। धूम्रपान व शराब से दूरी- तंबाकू और अत्यधिक अल्कोहल के सेवन से बचें।

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