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जूता गीला ना हो, इसलिए पटवारी बुजुर्ग की पीठ पर पर सवार हो गया: एसडीएम ने निलंबित किया

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक वायरल वीडियो ने सरकारी कर्मचारी के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक पटवारी पानी और कीचड़ से भरे रास्ते को पार करने के लिए करीब 65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर बैठा दिखाई दे रहा है। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से शिकायत की, जिसके बाद पटवारी को निलंबित कर दिया गया...

By Harsh 
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Viral-Video: मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक वायरल वीडियो ने सरकारी कर्मचारी के रवैये पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीडियो में एक पटवारी पानी और कीचड़ से भरे रास्ते को पार करने के लिए करीब 65 साल के बुजुर्ग की पीठ पर बैठा दिखाई दे रहा है। मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से शिकायत की, जिसके बाद पटवारी को निलंबित कर दिया गया।

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घटना गोपद बनास तहसील के माटा गांव की बताई जा रही है। वीडियो में ललबा केवट नाम के बुजुर्ग पानी से होकर आगे बढ़ते नजर आते हैं, जबकि हल्का पटवारी नीलेश नामदेव उनकी पीठ पर बैठे हुए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक रास्ते में पानी भरा होने के कारण जूता गीला होने से बचाने के लिए पटवारी ने बुजुर्ग का सहारा लिया,पटवारी के इस तरीके को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई।

वीडियो दोबारा सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आया। इसके बाद ग्रामीणों ने मंगलवार को कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी।

पहली नजर में व्यवहार असंवेदनशील मिला

कलेक्टर विकास मिश्रा के निर्देश पर अपर कलेक्टर बीपी पांडेय को मामले की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारी गांव पहुंचकर घटना से जुड़े तथ्यों और वायरल वीडियो की जानकारी जुटा रहे हैं। उधर गोपद बनास की एसडीएम प्रिया पाठक ने माटा के हल्का पटवारी नीलेश नामदेव के निलंबन का आदेश जारी कर दिया। प्रशासन के अनुसार शुरुआती जांच में पटवारी का आचरण असंवेदनशील और अपमानजनक प्रतीत हुआ है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है।

पटवारी पर वसूली के आरोप भी लगाए

ग्रामीणों ने सिर्फ वीडियो को लेकर ही शिकायत नहीं की है। उन्होंने पटवारी पर सरकारी कामों के बदले पैसे मांगने के आरोप भी लगाए हैं। शिकायत में शासकीय पट्टे, पीएम किसान सम्मान निधि, जाति प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र जैसे कामों के लिए कथित तौर पर सेवा शुल्क मांगने की बात कही गई है।

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प्रशासन ने इन आरोपों को भी जांच में शामिल कर लिया है। हालांकि, इन आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।

प्रशासन के मुताबिक वीडियो पुराना है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसके दोबारा वायरल होने और ग्रामीणों की शिकायत के बाद कार्रवाई की गई। फिलहाल पटवारी निलंबित है और आगे की कार्रवाई जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

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