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महंगा हुआ कच्चा तेल, तो खुल सकता है IEA का इमरजेंसी रिजर्व, 32 देशों की तैयारी पर नजर

By Harsh 
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मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ रहा है। अगर आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) अपने रणनीतिक तेल भंडार से अतिरिक्त सप्लाई जारी कर सकती है। तेल बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ब्रेंट क्रूड की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर लंबे समय तक बनी रहती है तो IEA के सदस्य देश इमरजेंसी ऑयल रिजर्व जारी करने पर फैसला ले सकते हैं।

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IEA के पास कितना तेल भंडार है?

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की स्थापना साल 1974 में तेल संकट के बाद की गई थी। इसका उद्देश्य वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखना और किसी बड़े सप्लाई संकट के समय सदस्य देशों की मदद करना है। IEA में कुल 32 सदस्य देश शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संगठन से जुड़े देशों के पास 1.2 अरब बैरल से ज्यादा सार्वजनिक आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है। इसके अलावा उद्योगों के पास भी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त तेल भंडारण उपलब्ध है।

पहले भी खोला जा चुका है तेल भंडार

IEA इससे पहले भी कई बार तेल भंडार जारी कर चुका है। 1991 के खाड़ी युद्ध, 2005 में तूफान कैटरीना के बाद, 2011 के लीबिया संकट और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाने के लिए रिजर्व का इस्तेमाल किया गया था। मार्च 2026 में भी IEA ने 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की थी, ताकि वैश्विक बाजार में सप्लाई को संतुलित किया जा सके। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार उसका पूरा आवंटन अभी बाजार में नहीं आया है।

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अगर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, ट्रांसपोर्ट लागत और महंगाई पर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए भी यह चिंता का विषय है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका-ईरान तनाव और तेल बाजार की चाल पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में अगर क्रूड की कीमतें नियंत्रण से बाहर जाती हैं, तो IEA का इमरजेंसी रिजर्व एक बार फिर वैश्विक बाजार को राहत देने का बड़ा कदम साबित हो सकता है।

रिपोर्ट: कल्पना पाण्डे

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