Advertisement
  1. हिन्दी समाचार
  2. खेल
  3. मेडल हरियाणा देता है तो कॉमनवेल्थ गेम्स गुजरात में क्यों? कांग्रेस MP दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्र सरकार पर भेदभाव का लगाया आरोप!

मेडल हरियाणा देता है तो कॉमनवेल्थ गेम्स गुजरात में क्यों? कांग्रेस MP दीपेंद्र हुड्डा ने केंद्र सरकार पर भेदभाव का लगाया आरोप!

By Abhimanyu 
Updated Date

Commonwealth Games 2030 : ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games) में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा है। इस संस्करण में भारत 13 गोल्ड समेत 39 मेडल के साथ चौथे पायदान पर रहा है। अब अक्टूबर 2030 में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) के 100वें ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण की मेजबानी भारत का अहमदाबाद करेगा। जिसको लेकर देश की सियासत गरमाने लगी है। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने इस मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने हरियाणा के साथ कथित भेदभाव को लेकर सरकार पर निशाना साधा है।

पढ़ें :- BRICS समिट: सात साल बाद भारत आ सकते हैं चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग, 400 लोगों का दल भी होगा साथ

दरअसल, कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सांसद जयप्रकाश जेपी, सांसद वरुण चौधरी, सांसद सतपाल ब्रह्मचारी और सांसद कर्मबीर बौद्ध के साथ सोमवार को तख्तियों के साथ संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया है। इस दौरान उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 का आयोजन अहमदाबाद की जगह हरियाणा में किए जाने या फिर हरियाणा को सह-मेजबान बनाए की मांग की है। हुड्डा ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में हरियाणा के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का हवाला दिया है, जिसमें अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने 11 पदक, जिनमें 7 स्वर्ण शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान  कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “… 13 गोल्ड मेडल में से 7 गोल्ड मेडल अकेले हरियाणा ने जीते। हमारी मांग है कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स हरियाणा में होने चाहिए। या तो हरियाणा 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेज़बानी करे, या उसे को-होस्ट राज्य बनाया जाए…”

हुड्डा ने आगे कहा, “जब ये गेम्स होंगे, तो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट में लाखों करोड़ का निवेश होगा… ‘खेलो इंडिया’ पहल के तहत, भारत सरकार ने गुजरात को सबसे ज़्यादा बजट दिया, जबकि हरियाणा को सबसे कम ‘खेलो इंडिया’ बजट मिला… अब तक हम सरकार से अपील कर रहे थे कि अगर भारत को 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 ओलंपिक्स की मेज़बानी का मौका मिलता है, तो हरियाणा को को-होस्ट के तौर पर शामिल किया जाना चाहिए… मेरा मानना ​​है कि हम हर मोर्चे पर यह लड़ाई लड़ेंगे—जिसमें संसद भी शामिल है…”

Advertisement