लखनऊ। सीमैप के निदेशक और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में महाराष्ट्र के 28 प्रगतिशील महिलाओं का समूह पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम का उद्घाटन सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किया । उन्होने इस अवसर पर कहा कि आज के स्टार्टअप्स, उद्यमिता के युग में सीमैप किसानों को औषधीय एवं सुगंधित खेती के साथ-साथ उद्यमिता के अवसर प्रदान कर रहा है। पिछले तीन दिनों में सीमैप के निदेशक और वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण के लिए आई महिलाओं ने विविधपूर्ण विषयों में स्वरोजगार के अवसरों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं
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गुलाब जल: महिला समूह के लिए नया अवसर के तहत पाँच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित महिलाओं का गुलाब से गुलाब जल बनाने और इसके आर्थिक लाभ पर सीमैप के डॉ. सुदीप टंडन और श्री राम लखन द्वारा जानकारी प्रदान की गई।
वर्मी कम्पोस्ट: नया बिजनेस मॉडल के तहत सीमैप में सुगंधित पौधों के आसवन विधि के बाद बचे हुये अपशिष्टों से गुणवत्ता पूर्ण वर्मी कम्पोस्ट कैसे बनाएँ इस पर तकनीकी उपलब्ध है । महाराष्ट्र की महिलाओं को डॉ. आलोक कालरा एवं डॉ. रक्षपाल सिंह ने उच्चतम गुणवत्ता की वर्मीकम्पोस्ट कैसे बनाएँ इस पर जानकारी प्रदान की ।
अगरबत्ती बनाकर गाँव की महिलाएं स्वावलंबी बनें के तहत सीएसआईआर-सीमैप द्वारा विकसित और जनमानस मे परिचित फूलों से और सुगंधित वनस्पतियों के अपशिष्टों से अगरबत्ती एवं कोन बनाने की तकनीकियों की बारीकियों को प्रशिक्षण के माध्यम से डॉ. आर. के. श्रीवास्तव और श्रीमती प्रियंका सिंह ने महिला प्रतिभागियों को प्रशिक्षित किया ।
कृषि क्षेत्र में ड्रोन के उपयोग और करियर के अवसर के तहत सीएसआईआर-सीमैप के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मनोज सेमवाल द्वारा प्रतिभागियों को ड्रोन के विभिन्न उपयोगों, योजनाओं और भविष्य में ड्रोन पायलट के रूप में रोजगार के अवसरों से परिचित कराया गया। आजकल फसलों और खेत में कीटनाशकों के अधिक उपयोग से बचने तथा खेत में खाद/उर्वरक के प्रयोग में समय लेने वाली प्रक्रिया से बचने के लिए ड्रोन की जागरूकता बढ़ रही है।
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महिला किसानों और उद्यमियों के इस पाँच दिवसीय प्रशिक्षण सत्र के समन्वयक डॉ. ऋषिकेश भिसे और डॉ. आर. एस. शर्मा ने प्रशिक्षण सत्र की गतिविधियों तथा तकनीकी सत्रों के नियोजन पर मार्गदर्शन कर रहे है।