नइ दिल्ली। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। अब 15 अक्टूबर से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगेगा। इसको लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने प्रेस कॉफ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा, नोटबंदी के बाद नेता विपक्ष राहुल गांधी जी ने कहा था-कैश को डीमनाइज करने की बात इसलिए की जा रही है, ताकि चंद लोगों की जेब में पैसा डाला जा सके।
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सप्रिया श्रीनेत ने आगे कहा, ‘वसूली मैन’ मोदी का कहर जारी है और इस बार की वसूली नरेंद्र मोदी अमेरिका के सामने सरेंडर करने की वजह से कर रहे हैं। वसूली के नए प्लान में ₹2,000 से ऊपर के हर merchant UPI पेमेंट पर 0.4% का चार्ज वसूला जाएगा। अगर आपने ₹5,000 की खरीदारी की तो ₹20 का चार्ज लगेगा। अगर ₹10,000 की खरीदारी की तो ₹40 वसूला जाएगा।
पहले UPI पेमेंट पूरी तरह फ्री था, लेकिन नरेंद्र मोदी से ये देखा नहीं गया और उन्होंने यहां भी वसूली का खेल शुरू कर दिया। ये वसूली देश के युवाओं, गरीबों, छात्रों, मजदूरों और महिलाओं से की जाएगी। मगर अब सरकार एक झुनझुना पकड़ा रही है कि इसका असर किसी ग्राहक पर नहीं, बल्कि merchant पर पड़ेगा। लेकिन हम सब जानते हैं कि कोई भी merchant बढ़े हुए खर्च को नहीं झेलेगा। आखिर में merchant सामानों की कीमत बढ़ा देगा और ग्राहक से पैसा वसूला जाएगा।
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, अमेरिका की पेमेंट कंपनियां लगातार भारत की Zero MDR नीति का विरोध करती रही हैं, जिनके सामने नरेंद्र मोदी ने सरेंडर कर दिया है। US Trade Representative की 2026 की रिपोर्ट में भारत की UPI और RuPay के मुफ्त होने की आलोचना की गई थी। कहा गया कि इससे अमेरिका के Visa और Mastercard का नुकसान हो रहा है। अमेरिका ने कहा कि भारत को MDR बढ़ाना चाहिए- उन्होंने कहा और नरेंद्र मोदी ने ये कर दिखाया।
इसके साथ ही कहा, अब सवाल उठता है कि 2,000 रुपए से ऊपर के Merchant UPI पेमेंट पर जो चार्ज लगाया गया है… उसके सबसे बड़े लाभार्थी कौन हैं? जवाब है- PhonePe, Google Pay…PhonePe और Google Pay का 86% मार्केट पर कब्जा है, ऐसे में MDR रेवेन्यू उनकी कमाई और वैल्यूएशन बढ़ाएगा। यानी इसका सबसे बड़ा फायदा PhonePe, Google Pay और Amazon Pay को होगा- ये सभी अमेरिकी कंपनियों से जुड़े पेमेंट प्लेटफॉर्म हैं। मतलब भारतीयों की जेब से वसूली कर, अमेरिका की कंपनियों की तिजोरियां भरी जा रही है।
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